कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मुश्किल हालात भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकते। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रीति प्रजापति की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। साधारण परिवार और सीमित संसाधनों के बीच मॉडलिंग के वीडियो बनाकर पहचान बनाने वाली प्रीति आज सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उनका सफर दिखाता है कि आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

बस्ती की गलियों को बनाया रैंप, आत्मविश्वास से जीता लोगों का दिल
प्रीति प्रजापति के लिए मॉडलिंग की राह आसान नहीं रही। सीमित संसाधनों के कारण उनके पास शुरुआत में महंगे कपड़े और पेशेवर शूटिंग की सुविधाएं नहीं थीं। उन्होंने पुराने कपड़ों और अपनी बस्ती की गलियों में ही वीडियो बनाना शुरू किया।
प्रीति ने अपने सांवले रंग को कमजोरी मानने के बजाय उसे अपनी पहचान का हिस्सा बनाया। उनका अंदाज, आत्मविश्वास और कैमरे के सामने सहजता लोगों को पसंद आने लगी। धीरे-धीरे उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे और उन्हें पहचान मिलने लगी।
छोटी बहन बनीं सबसे बड़ा सहारा
प्रीति के इस सफर में उनकी छोटी बहन ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल प्रीति का हौसला बढ़ाया, बल्कि वीडियो बनाने में डिजाइनिंग और कैमरा संभालने जैसी जिम्मेदारियां भी निभाईं।
प्रीति के मुताबिक, शुरुआत में वह अपनी आर्थिक स्थिति को छिपाने की कोशिश करती थीं। लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि जिन परिस्थितियों को लेकर वह संकोच करती थीं, वही उनके संघर्ष और सफर की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गईं।
परिवार का साथ और अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखते हुए प्रीति आगे बढ़ती रहीं। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
कलेक्टर बनने का सपना, अब मॉडल और एक्ट्रेस बनने की चाह
प्रीति प्रजापति कभी प्रशासनिक सेवा में जाकर कलेक्टर बनने का सपना देखती थीं। हालांकि, सोशल मीडिया पर पहचान मिलने के बाद अब उनका लक्ष्य मॉडलिंग और अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाना है।
वह एक सफल मॉडल और एक्ट्रेस बनना चाहती हैं। इसके साथ ही उनका एक भावनात्मक सपना अपने माता-पिता के लिए पक्का और सुंदर घर खरीदना है, ताकि वह अपने परिवार को बेहतर जीवन दे सकें।
संघर्ष से पहचान तक का सफर
प्रीति प्रजापति की कहानी बताती है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके आर्थिक हालात या बाहरी रूप से तय नहीं होती। अपने हुनर पर विश्वास, लगातार प्रयास और परिवार का सहयोग मुश्किल रास्तों को भी आसान बनाने में मदद कर सकते हैं।
भोपाल की गलियों से सोशल मीडिया तक पहुंचने का उनका सफर इस बात की याद दिलाता है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े संसाधनों का होना जरूरी नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने का जज्बा भी उतना ही मायने रखता है।