भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता सहित तीन प्रमुख मांगों को लेकर शिक्षकों का आंदोलन जारी है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग संभागों के शिक्षक चरणबद्ध तरीके से शामिल हो रहे हैं। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

अलग-अलग संभागों के शिक्षक धरने में हुए शामिल
नीलम पार्क में चल रहे प्रदर्शन में अब तक जबलपुर, ग्वालियर-चंबल, रीवा-शहडोल और उज्जैन संभाग के शिक्षक पहुंच चुके हैं। शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर ठोस कदम उठाने की अपील की है।
शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगें
1. TET की अनिवार्यता से मिले छूट
शिक्षकों की पहली मांग है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त किया जाए। इसके लिए राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करे और उसे केंद्र सरकार को भेजे।
2. प्रथम नियुक्ति की तारीख से हो सेवा की गणना
शिक्षकों की दूसरी मांग है कि उनकी सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति की तिथि से की जाए। इसी आधार पर वरिष्ठता निर्धारित करने की मांग भी उठाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि सेवा की गणना और वरिष्ठता के मामले में उनकी मांग पर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
3. ई-अटेंडेंस व्यवस्था को बनाया जाए स्वैच्छिक
तीसरी मांग सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक बनाने की है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें शिक्षण कार्य के साथ विभिन्न विभागीय और शासकीय जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में ई-अटेंडेंस की व्यवस्था को स्वैच्छिक किया जाना चाहिए।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
फिलहाल, भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों का प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी है। अब आंदोलनकारियों की नजर सरकार की प्रतिक्रिया और मांगों पर होने वाले निर्णय पर है।