बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र में दो युवकों की हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस सुधीर कुमार की सिंगल बेंच ने अजय उर्फ कल्लू कोशले, राममोहन बंजारे उर्फ भुरू और गौतम उर्फ गोपाल सारथी की जमानत अर्जियों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

तीनों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 और 302 के साथ आयुध अधिनियम की धाराओं 25 और 27 के तहत आरोप हैं।
हमले में घायल दो युवकों की इलाज के दौरान हुई थी मौत
मामला 23 अगस्त 2023 की रात का है। बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर राजेश रावत और देवा नेताम पर धारदार हथियारों से हमला किया था। हमले में घायल दोनों युवकों की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
बचाव पक्ष ने कहा- झूठा फंसाया गया
आरोपियों की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। आरोप पत्र दाखिल हो चुका है और आरोपी 24 अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं।
बचाव पक्ष के मुताबिक, मामले में कुल 26 गवाह हैं, जिनमें से 13 की गवाही हो चुकी है। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि गवाहों ने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया है और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में अभी काफी समय लग सकता है। इसी आधार पर आरोपियों ने जमानत देने की मांग की।
राज्य ने आपराधिक पृष्ठभूमि और हथियार जब्ती का दिया हवाला
राज्य की ओर से जमानत याचिकाओं का विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपियों ने मिलकर दोनों युवकों की हत्या की थी। सह-आरोपी के कथन के आधार पर घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू भी जब्त किया गया है।
राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि अजय उर्फ कल्लू कोशले के विरुद्ध पहले से तीन और गौतम उर्फ गोपाल सारथी के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह भी बताया गया कि गौतम की पहली जमानत याचिका हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
हाईकोर्ट ने इन आधारों पर जमानत देने से किया इनकार
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जमानत के स्तर पर गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले में अभी 13 गवाहों की गवाही शेष है और सह-आरोपी के कथन के आधार पर हथियार की जब्ती सहित आरोपियों के खिलाफ अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं।
इन तथ्यों और आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अदालत ने तीनों को जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।