भोपाल। मध्य प्रदेश में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस सम्मान को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को सनातन विरोधी बताया है।

कांग्रेस का सवाल- किस नियम के तहत दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर?
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने इस मामले में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार संविधान विरोधी हो चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस नियम और कानून के तहत एक निजी संत को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया?
चौधरी ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सम्मान देने के पीछे किसका आदेश या निर्देश था। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
धीरेंद्र शास्त्री के भाई को लेकर भी लगाए आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई पर हत्या, हत्या के प्रयास और अवैध कब्जे जैसे गंभीर मामलों के आरोप हैं। उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में नियम-कायदे और अनुशासन खत्म हो चुके हैं तथा सरकार फर्जी बाबाओं के सामने नतमस्तक है।
उन्होंने ओरछा मंदिर का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में मठ-मंदिरों की पारंपरिक व्यवस्थाएं हटाई जा रही हैं।
भाजपा का पलटवार- कांग्रेस को सनातन का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में कानून सभी के लिए समान है। समाज के हर वर्ग और समुदाय में बाबा के भक्त मौजूद हैं।
यादव ने कहा कि किसके कहने पर और किन परिस्थितियों में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, इसकी पूरी समीक्षा जिम्मेदार अधिकारी ही करेंगे।
भाजपा ने कांग्रेस को बताया सनातन विरोधी
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से सनातन विरोधी रही है। जनता सब जानती है और भाजपा को कांग्रेस से सनातन धर्म के समर्थन का कोई प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।
इस तरह धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का मामला अब प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।