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बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया और संबंधित दस्तावेज सदन में रखने की अनुमति भी नहीं दी। इसके विरोध में विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंचे, जिसके चलते वे नियमों के तहत स्वतः निलंबित हो गए।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि जिन 85 मकानों को तोड़ा गया, उनमें कई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे और वहां बिजली-पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को दिए जा रहे वैकल्पिक आवास बहुत छोटे हैं। कांग्रेस विधायकों ने पुनर्वास की समुचित व्यवस्था किए बिना बेदखली को गलत बताया।
वहीं, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। अतिक्रमण की शिकायत की जांच के बाद 2025 में बेदखली का आदेश जारी हुआ और 28 जून को कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों को पहले सामान हटाने का समय दिया गया तथा नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट उपलब्ध कराकर उनका पुनर्वास किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि कार्रवाई के दौरान लोगों के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
मंत्री के जवाब के बाद अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया, जिसके विरोध में विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और नियमों के अनुसार सभी विपक्षी विधायक स्वतः निलंबित हो गए।