November 8, 2026

दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोककलाएं यहां के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के साथ कलाकारों को प्रोत्साहन देने तथा व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। यह बात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिवस पर दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से पहुंचे लोक कलाकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी ने अनेक महान कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से प्रदेश की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाई है।

तीजन बाई के सम्मान में इसी साल से मिलेगा लोककला अलंकरण

मुख्यमंत्री साय ने पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी ऐसी लोकविधा है, जिसमें कलाकार महाभारत की कथा और उसके पात्रों को गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के जरिए जीवंत कर देता है। तीजन बाई ने इस कला को दुनिया के अनेक मंचों तक पहुंचाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि तीजन बाई के गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। वहां के हाईस्कूल का नामकरण भी उनके नाम पर करने की पहल की जाएगी। इसके अलावा इसी वर्ष से राज्योत्सव के अवसर पर तीजन बाई के नाम से लोककला अलंकरण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी कला-साधना के प्रति श्रद्धांजलि होने के साथ प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी परंपरागत विधाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।

छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के कलाकारों और फिल्म जगत को नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए काम कर रही है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ी सिनेमा और अन्य फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रदेश के कलाकारों और युवाओं के लिए रोजगार तथा रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते खुलेंगे।

70 कलाकार दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि

मुख्यमंत्री साय ने आयोजकों की मांग पर पंडवानी महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इन दलों में पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बानबरद मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने और अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड निर्माण की घोषणा भी की।

लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा: मंत्री गजेंद्र यादव

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने में यहां के कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं प्रदेश के जीवन और सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। ये केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा हैं।

उन्होंने कलाकारों से महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी इसी उत्साह के साथ जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया।

पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने रखीं कलाकारों की मांगें

कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन दिया और कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था का लगातार 46 वर्षों तक लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करना बड़ी उपलब्धि है। इस मंच ने कलाकारों को अवसर देने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और ज्ञानश्रोत लोककला मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम को विधायक रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकार और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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