मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार में भोजशाला विवाद के बाद अब लाट मस्जिद को लेकर नया विवाद सामने आया है। सनातन प्रहरी समिति ने 15 सितंबर को ‘वराह मार्च’ निकालने का ऐलान किया था। समिति की ओर से इस मार्च को लेकर प्रशासन को सूचना दिए जाने और अनुमति की जरूरत नहीं होने की बात कही गई थी, जबकि जिला प्रशासन ने किसी भी संगठन को रैली की अनुमति नहीं दी।

प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए शहर में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए और मार्च पर रोक लगा दी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग बढ़ाई गई।
‘विजय मंदिर’ होने का संगठन का दावा
सनातन प्रहरी समिति का दावा है कि वर्तमान में लाट मस्जिद के नाम से जानी जाने वाली संरचना पहले राजा भोज का विजय मंदिर थी। संगठन की ओर से परिसर में मौजूद ऐतिहासिक स्तंभ और उस पर बनी वराह आकृति को अपने दावे के समर्थन में पेश किया जा रहा है। इसी के आधार पर समिति ने वराह मार्च निकालने की घोषणा की थी।
वहीं, धार जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर इस ऐतिहासिक संरचना को लाट मस्जिद के नाम से दर्ज किया गया है। वेबसाइट के अनुसार इसका निर्माण 1405 ईस्वी में दिलावर खान ने कराया था और परिसर में मौजूद लौह स्तंभ के कारण इसे लाट मस्जिद कहा गया।
प्रशासन ने मार्च की अनुमति की निरस्त
धार प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 15 सितंबर को किसी भी संगठन को मार्च या रैली निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं करने की अपील की।
प्रशासन की ओर से शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च से जुड़े कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
ASI ने संरक्षित परिसर को रखा बंद
विवादित स्थल की सुरक्षा को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 15 सितंबर को गंजिखाना स्थित संरक्षित परिसर को आम लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला किया। अनधिकृत प्रवेश और किसी भी तरह की उपद्रवी गतिविधि पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
भारी पुलिस बल की तैनाती
वराह मार्च को लेकर प्रशासन ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया और निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रहे।
लाट मस्जिद को लेकर ‘विजय मंदिर’ और ‘लाट मस्जिद’ से जुड़े अलग-अलग दावों के बीच प्रशासन का जोर फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संरक्षित स्मारक की सुरक्षा पर है।