बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर क्या है विवाद?
कांग्रेस और सामाजिक कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती की ओर से दायर याचिका में 90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिपरिषद की संख्या को लेकर संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के तहत राज्य में मंत्रिपरिषद की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
इसी आधार पर याचिका में 14वें मंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित था मामला
बताया गया है कि इस मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। वहां मामला लंबित रहने के बाद अब उसके निरर्थक होने पर हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू हुई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
90 सदस्यीय विधानसभा और 15 प्रतिशत का गणित
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। संविधान में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक निर्धारित की गई है।
90 का 15 प्रतिशत 13.5 होता है। इसी गणित और संवैधानिक प्रावधान की व्याख्या को लेकर 14वें मंत्री की नियुक्ति पर विवाद खड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस नियुक्ति की संवैधानिक वैधता की अदालत द्वारा समीक्षा की जानी चाहिए।
अब हाईकोर्ट में राज्य सरकार के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि सरकार 14 सदस्यीय मंत्रिपरिषद को लेकर संवैधानिक प्रावधानों की किस तरह व्याख्या करती है।