- वर्ष 2018 में जिला पंचायत सूरजपुर ने ग्राम पंचायत सचिव के 11 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया।
- याचिकाकर्ता देवेन्द्र कुमारी साहू का नाम चयन के बाद मेरिट सूची में था, लेकिन उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला।
- सात वर्ष से अधिक समय तक नियुक्ति न मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
- राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले आवश्यक राज्य शासन और वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई थी। इसलिए विज्ञापन नियमों के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी हुआ।
- इसके बाद पंचायत निदेशालय के निर्देश पर 22 अक्टूबर 2025 को जिला पंचायत सीईओ ने पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी।

हाईकोर्ट का निर्णय:
- यदि सक्षम प्राधिकारी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को वैध रूप से रद्द कर दिया है, तो मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग नहीं कर सकता।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि मेरिट सूची में नाम होना नियुक्ति का सुनिश्चित या कानूनी अधिकार नहीं देता। नियुक्ति तभी संभव है जब भर्ती प्रक्रिया वैध रूप से पूरी हो और उसे रद्द न किया गया हो।
यह निर्णय भर्ती संबंधी मामलों में उस स्थापित कानूनी सिद्धांत को दोहराता है कि चयन सूची में स्थान मिलना और नियुक्ति का अधिकार प्राप्त होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।