पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय से सामने आई तस्वीरें छात्रों की परिवहन समस्या के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। विश्वविद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं को 52 सीटर बस में 100 से अधिक लोगों के साथ सफर करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई छात्रों को सीट तो दूर, ठीक से खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती। कुछ छात्र बस के गेट और सीढ़ियों पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं।

10 हजार छात्र, परिवहन के लिए सिर्फ 6 बसें
जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय में दूर-दराज के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से महज 6 बसों की व्यवस्था बताई जा रही है।
बसें दिन में दो-दो चक्कर लगाती हैं, लेकिन छात्रों की संख्या के मुकाबले यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। नतीजतन बसों में हर ट्रिप के दौरान भारी भीड़ और ओवरलोडिंग की स्थिति बन रही है।
सीट नहीं मिली तो गेट पर लटककर सफर
बसों में भीड़ का आलम यह है कि कई छात्रों को बैठने की जगह नहीं मिलती। बस के अंदर खड़े होने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं रहता। ऐसे में कुछ छात्र मजबूरी में बस की सीढ़ियों और गेट के आसपास खड़े होकर सफर करते नजर आते हैं।
यह स्थिति छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। अचानक ब्रेक लगने, तेज मोड़ या किसी अन्य आपात स्थिति में बस के गेट के पास खड़े यात्रियों के साथ दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों की बढ़ी परेशानी
विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से आते हैं। उनके लिए नियमित और सुरक्षित परिवहन की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। बसों की संख्या कम होने के कारण उन्हें उपलब्ध बसों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
छात्रों के मुताबिक, पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें भीड़भाड़ वाली बसों में सफर करना पड़ता है। ऐसे में पढ़ाई के लिए रोजाना आने-जाने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
क्या बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
52 सीट क्षमता वाली बसों में 100 से अधिक यात्रियों के सफर और छात्रों के गेट पर लटककर यात्रा करने की स्थिति को लेकर अब विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या छात्रों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने के लिए बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी? छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान करे, ताकि विद्यार्थियों को जान जोखिम में डालकर कॉलेज आने-जाने के लिए मजबूर न होना पड़े।