भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन से शुरू होने वाली यह पदयात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे से जुड़े सवालों को उठाना बताया जा रहा है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, यात्रा में करीब 930 किलोमीटर की दूरी 70 दिनों में पैदल तय करने की योजना है। हालांकि, यात्रा की तारीख, मार्ग और कार्यक्रम से संबंधित सभी विवरणों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
उज्जैन से ओरछा होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश
प्रस्तावित रूट के अनुसार, यात्रा की शुरुआत उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से होगी। इसके बाद पदयात्रा मध्य प्रदेश के तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए निवाड़ी जिले के ओरछा पहुंचेगी। ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर को भी यात्रा मार्ग में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। प्रस्तावित मार्ग में चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी जैसे स्थान शामिल बताए गए हैं। यात्रा का अंतिम पड़ाव अयोध्या प्रस्तावित है।
70 दिनों में 930 किलोमीटर की पदयात्रा का लक्ष्य
योजना के अनुसार, पदयात्रा करीब 70 दिनों तक चलेगी और इस दौरान लगभग 930 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यात्रा के जरिए धार्मिक और वैचारिक मुद्दों को उठाने की तैयारी बताई जा रही है।
दिग्विजय सिंह की इस पहल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है। हालांकि, यात्रा की वास्तविक समय-सारिणी, प्रतिदिन तय की जाने वाली दूरी और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या जैसे विवरणों की पुष्टि होना बाकी है।
राम मंदिर चंदे के मुद्दे को उठाने की तैयारी
प्रस्तावित ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे से जुड़े सवालों को प्रमुखता दिए जाने की बात कही जा रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
यात्रा के अयोध्या पहुंचने पर रामलला के दर्शन के साथ इसका समापन किए जाने की योजना बताई गई है। फिलहाल, यात्रा के आधिकारिक कार्यक्रम और मार्ग की पुष्टि होने के बाद ही इसके आयोजन से जुड़ी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।