September 14, 2026

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच मजबूत करने के लिए नई टेक होम राशन (THR) व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार टीएचआर का वितरण शुरू किया है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य पोषण आहार की उपलब्धता को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाना है। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पात्र हितग्राहियों को वर्ष में न्यूनतम 300 दिनों तक पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

3 से 6 वर्ष के बच्चों को रोज मिलेगा गर्म भोजन

आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को प्रतिदिन नाश्ता और गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं, 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन तथा शेष दिनों में टीएचआर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

इसके अलावा 6 से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित (SAM) और 6 से 72 माह के अति कम वजन (SUW) बच्चों को अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में स्थानीय स्तर पर तैयार टीएचआर दिया जा रहा है।

पोषण की निगरानी के साथ स्वास्थ्य जांच

बच्चों की पोषण स्थिति पर नजर रखने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में नियमित रूप से वजन और लंबाई-ऊंचाई मापकर जानकारी पोषण ट्रैकर पर दर्ज की जा रही है। चिन्हित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल की जा रही है।

जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग और पोषण पुनर्वास केंद्रों के साथ समन्वय कर बच्चों को रेफर किया जाता है। हर महीने आयोजित 10 दिवसीय शारीरिक माप दिवस में जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाती है।

विशेष जनजातीय क्षेत्रों में 681 नए आंगनवाड़ी केंद्र

सरकार ने विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 681 नए आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है।

सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में बच्चों की वृद्धि, पोषण स्थिति की निगरानी, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ेगी

नई टीएचआर व्यवस्था से बच्चों और माताओं तक स्थानीय स्तर पर तैयार पोषण आहार पहुंचाने के साथ स्व-सहायता समूहों को भी अधिक भागीदारी का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य पोषण सेवाओं को स्थानीय, प्रभावी और सतत बनाना है।

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