September 13, 2026

दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के वित्तीय अधिकार वापस लेने का बड़ा फैसला किया है। आगामी आदेश तक विश्वविद्यालय के भुगतान संबंधी प्रपत्रों और बैंकिंग लेन-देन में वित्त अधिकारी के साथ द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव को अधिकृत किया गया है। अब कुलसचिव के हस्ताक्षर से कोई वित्तीय लेन-देन नहीं होगा।

विश्वविद्यालय ने इस संबंध में आयुक्त, उच्च शिक्षा संचालनालय को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। पत्र के साथ कुलसचिव के खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रति भी संलग्न की गई है।

एफआईआर के बाद लिया गया फैसला

विश्वविद्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया है कि कुलसचिव वित्तीय देयकों, नस्तियों और अन्य प्रपत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वित्तीय कार्यों को लेकर लागू नियमों का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर और जमानत की स्थिति में ऐसे वित्तीय दायित्वों को लेकर मार्गदर्शन आवश्यक है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय निधि में अनियमितता से जुड़ा मामला जांच के अधीन है। ऐसे में भुगतान, बैंकिंग, वेतन वितरण, क्रय और वित्तीय अभिलेखों की अभिरक्षा जैसी जिम्मेदारियां उसी अधिकारी के पास रहना संस्थागत निष्पक्षता के लिहाज से उचित नहीं है। अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका का भी उल्लेख किया गया है।

कार्यपरिषद की बैठक में गरमाया मामला

हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में कुलसचिव के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद उनके वित्तीय अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कुलपति ने कहा कि मामला कार्यपरिषद के समक्ष है और हितधारक होने के कारण निष्पक्ष चर्चा के लिए कुलसचिव की उपस्थिति उचित नहीं होगी।

कुलसचिव ने कहा कि यदि कार्यपरिषद के सभी सदस्य सहमत होंगे, तभी वे बैठक से बाहर जाएंगे। इसके बाद सदस्यों ने लिखित सहमति देते हुए हस्ताक्षर किए। कुलसचिव को संबंधित कंडिका की चर्चा से अलग कर दिया गया और डॉ. नीलू श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाकर आगे की कार्यवाही की गई।

अब अधिष्ठाता छात्र कल्याण संभालेंगी वित्तीय जिम्मेदारी

विश्वविद्यालय में सामान्य तौर पर वित्तीय कार्यों की प्रक्रिया कुलसचिव और वित्त अधिकारी के माध्यम से पूरी होती है। अब कार्यपरिषद के निर्णय के बाद यह जिम्मेदारी डॉ. नीलू श्रीवास्तव निभाएंगी। वे वित्त अधिकारी के साथ मिलकर बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कार्यों को देखेंगी।

डॉ. श्रीवास्तव शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में प्राध्यापक हैं और शासन की प्रतिनियुक्ति पर विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता छात्र कल्याण के पद पर कार्यरत हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार वे इस जिम्मेदारी के लिए निर्धारित अर्हताएं पूरी करती हैं।

वित्तीय अनियमितता की जांच के बीच फैसला

कार्यपरिषद ने अपने संकल्प में कहा है कि कुलसचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय के वित्तीय हितों, प्रशासनिक निष्पक्षता और कामकाज की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है।

यह निर्णय छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 24 और संबंधित प्रावधानों के साथ विश्वविद्यालय में लागू परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों और वित्तीय नियमों के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर लिया गया है। संकल्प पर कुलपति, प्रभारी सचिव और कार्यपरिषद के सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।

पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन के ऑडिट की मांग

इसी बीच विश्वविद्यालय के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराने की मांग भी उठी है। शिकायत में वित्तीय अभिलेख, बैंक दस्तावेज, कैशबुक और क्रय संबंधी नस्तियों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

सत्र 2024-25 की परीक्षाओं से जुड़े एक बाहरी फर्म को स्वीकृत करीब 92.10 लाख रुपये के भुगतान समेत कुछ अन्य खर्चों की स्वतंत्र जांच की मांग भी सामने आई है। साथ ही कुलाधिपति से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

कुलसचिव के वित्तीय अधिकार वापस लेने के इस निर्णय के बाद अब विश्वविद्यालय के वित्तीय कामकाज में नई व्यवस्था लागू हो गई है। वहीं, एफआईआर और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच के परिणाम पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

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