भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद भोपाल के ऐतिहासिक बड़े तालाब की वास्तविक सीमा का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। तालाब का जलस्तर फिलहाल फुल टैंक लेवल (FTL) के करीब है। ऐसे में सीमा निर्धारण के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें जियो-टैगिंग, ड्रोन सर्वे, ग्राउंड ट्रुथिंग, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी शामिल हैं।

15 दिन में NGT कमेटी को सौंपनी होगी रिपोर्ट
NGT द्वारा गठित कमेटी को नए सर्वे और जांच के बाद 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। सर्वे के जरिए बड़े तालाब के साथ-साथ उसके वेटलैंड, बफर जोन और ‘जोन ऑफ इन्फ्लुएंस’ यानी प्रभावित क्षेत्र की सीमाओं को भी सटीक रूप से चिह्नित किया जाएगा।
इस दौरान तालाब के पुराने मुनार और पिलरों की भी जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि भविष्य में सीमा को लेकर किसी तरह का विवाद न रहे और चिन्हित सीमाओं की निगरानी की जा सके।
नए सीमांकन से बढ़ सकती है अतिक्रमण की संख्या
नए सिरे से सीमांकन होने के बाद तालाब क्षेत्र में सामने आने वाले अवैध और अनाधिकृत निर्माणों की संख्या बढ़ने की आशंका है। इससे पहले मार्च से जून के बीच किए गए शुरुआती सीमांकन में 347 अतिक्रमणों की पहचान की गई थी।
नए सर्वे में तालाब की वास्तविक सीमा और उससे जुड़े प्रतिबंधित क्षेत्रों का दायरा स्पष्ट होने के बाद निर्माण गतिविधियों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
FTL से 50 और 250 मीटर तक निर्माण पर रोक
नियमों के मुताबिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रतिबंध निर्धारित हैं।
- शहरी क्षेत्र: FTL से 50 मीटर के दायरे में किसी भी स्थायी या अस्थायी निर्माण पर रोक।
- ग्रामीण क्षेत्र: FTL से 250 मीटर के दायरे में निर्माण प्रतिबंधित।
- वेटलैंड, बफर जोन और ‘जोन ऑफ इन्फ्लुएंस’ में भी अनाधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी।
3 महीने में हटाने होंगे अवैध निर्माण
NGT के निर्देशों के अनुसार वेटलैंड, बफर जोन और ‘जोन ऑफ इन्फ्लुएंस’ में पाए जाने वाले अवैध और अनाधिकृत निर्माणों को तीन महीने के भीतर हटाना होगा।
नए सीमांकन के बाद भोपाल के बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद प्रशासन द्वारा चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई तेज की जा सकती है।
बड़े तालाब की सीमा का यह नया सर्वे न केवल अतिक्रमण की पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि तालाब और उसके आसपास के पर्यावरणीय क्षेत्र के संरक्षण के लिए भी अहम कदम है।