September 15, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चली आ रही कोशिशों के बाद पहली बार नेशनल गेम्स की मेजबानी का रास्ता खुल सकता है। राज्य सरकार ने 40वें नेशनल गेम्स को छत्तीसगढ़ में आयोजित कराने के लिए तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में शनिवार को सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक हुई, जिसमें बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांवों, वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। जरूरत उनकी समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की है।

40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए होगा प्रयास

बैठक में 40वें नेशनल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में कराने के मुद्दे पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ने का समय है।

उन्होंने कहा कि 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। यदि राज्य को इसकी मेजबानी मिलती है तो खेलों के आयोजन को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर का बड़ा खेल आयोजन बस्तर के युवाओं को प्रेरित करने के साथ देश-दुनिया के सामने बदलते और आगे बढ़ते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करने का अवसर भी बनेगा।

नेशनल गेम्स से खेल अधोसंरचना को मिलेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल गेम्स जैसे बड़े आयोजन से प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास को और गति मिलेगी। स्थानीय खिलाड़ियों को देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलेगा। इससे छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दे रही है। खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का भी माध्यम हैं।

उद्योग समूहों को खेल संघों से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई बड़े उद्योग समूह काम कर रहे हैं। इनके सहयोग को खेलों के विकास से जोड़ा जाए तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उद्योग समूह यदि अलग-अलग खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें तो खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और खेलों के विकास को नई गति मिलेगी।

ओलंपिक संघ और सरकार के बीच बेहतर समन्वय

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और राज्य शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की बात कही। खेल संघों की आवश्यकताओं और शासन स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को ओलंपिक संघ के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने की बात कही गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान हो और खिलाड़ियों को सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का पूरा लाभ मिले, इसके लिए शासन और खेल संगठनों के बीच लगातार संवाद जरूरी है।

रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने पर काम चल रहा है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है।

रायपुर में करीब 60 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। इन सुविधाओं के जरिए खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

पंडरापाठ में 20-25 करोड़ की आर्चरी अकादमी

जशपुर के पंडरापाठ में करीब 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर अंचल में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा है और विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और परंपरा से जुड़ा हुआ है।

अकादमी बनने से जशपुर सहित आसपास के वनांचल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

बस्तर और सरगुजा ओलंपिक से तलाशे जा रहे खिलाड़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा में खेल प्रतिभाओं की बड़ी संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। राज्य सरकार बस्तर ओलंपिक का आयोजन हर साल करेगी।

इसी तरह सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय खिलाड़ियों को आगे आने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के जरिए प्रदेशभर की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत से खिलाड़ियों का बढ़ा उत्साह

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी।

वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की प्रतिभाएं

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन देने की है।

उन्होंने कहा कि बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। व्यक्तिगत और सामूहिक खेलों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जाना चाहिए।

सांसद विजय बघेल ने भी प्रदेश में खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया।

अन्य जिलों में भी बनेंगे जिला ओलंपिक संघ

बैठक में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछली एग्जीक्यूटिव बॉडी बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस दौरान खेल गतिविधियों, नेशनल गेम्स, खेल संघों की आवश्यकताओं और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।

प्रदेश में वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाए जाने पर सहमति बनी।

बैठक में ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष विजय बघेल, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, शरद शुक्ला, रमेश कुमार श्रीवास्तव और सुनील कुमार अग्रवाल समेत विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

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