September 16, 2026

जांजगीर-चांपा। जिले के बम्हनीडीह में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ हो गया है। कथा के दौरान उन्होंने प्रेसवार्ता कर सत्संग, सनातन धर्म, सामाजिक व्यवस्था, आरक्षण, धर्म परिवर्तन और फिल्मों में साधु-संतों के चित्रण समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि कलियुग में भागवत कथा और राम कथा का श्रवण-वाचन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। उनके मुताबिक, धार्मिक आयोजनों और सत्संग के जरिए व्यक्ति के मन की विकृतियां दूर होती हैं और उसे जीवन में सुधार की प्रेरणा मिलती है।

आरक्षण का किया समर्थन

आरक्षण को लेकर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ उन परिवारों तक पहुंचना चाहिए, जो सामाजिक रूप से दबे हुए हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

उन्होंने यूजीसी से जुड़े कानून को लेकर भी आपत्ति जताई और आशंका व्यक्त की कि इस तरह के प्रावधानों से समाज में जातिगत तनाव और हिंसा बढ़ सकती है।

‘जाति-पाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश’

छत्तीसगढ़ की जनता की तारीफ करते हुए अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा, “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।” उन्होंने प्रदेशवासियों को सहज, सरल और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ बताया।

उन्होंने सनातन धर्म को देश, समाज और परिवार को एक सूत्र में बांधने वाला बताया। साथ ही आरोप लगाया कि जाति-पाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज आपस में बंटा, तब-तब बाहरी ताकतों को शासन करने का मौका मिला।

मनुस्मृति को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी गलत व्याख्या कर सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जाती रही है।

सती प्रथा पर बोले- सनातन धर्म को बदनाम किया गया

सती प्रथा के मुद्दे पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ने कभी सती प्रथा का समर्थन नहीं किया। उन्होंने रामायण और महाभारत काल का उल्लेख करते हुए कहा कि पति की मृत्यु के बाद पत्नी का सती होना अनिवार्य नहीं था।

उनके मुताबिक, कुछ स्थानों पर महिलाओं को जबरन सती कराया गया, जिसके कारण पूरे सनातन धर्म को बदनाम किया गया। उन्होंने कहा कि बाद में राजा राममोहन राय के प्रयासों से इस कुप्रथा को समाप्त किया गया।

धर्म परिवर्तन को लेकर जागरूकता की अपील

धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने सरकार के साथ-साथ आम लोगों से भी जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने लोगों से किसी तरह के बहकावे में आकर धर्म परिवर्तन नहीं करने का आग्रह किया।

उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने और गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग भी सरकार से की।

फिल्मों में साधु-संतों के चित्रण पर जताई नाराजगी

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने फिल्मों और वेब सीरीज में साधु-संतों के चित्रण को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्मों में अक्सर सवर्ण समाज को नकारात्मक या विलेन के रूप में दिखाया जाता है।

उन्होंने कुछ फिल्मों और वेब सीरीज, विशेषकर ‘आश्रम’ का उल्लेख करते हुए साधु-संतों के अपमान का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्मों के जरिए सनातन धर्म को पीछे करने और इस्लाम को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है।

‘हनुमान अंश’ की तारीफ

वहीं, हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ की अनिरुद्धाचार्य महाराज ने तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों के जीवन, उनके योगदान और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा पर आधारित फिल्मों का निर्माण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के बारे में जानकारी मिल सकती है।

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