विदिशा। गणेशोत्सव के अवसर पर मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित प्रसिद्ध ‘श्री बाढ़ वाले गणेश मंदिर’ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भोपाल-विदिशा मार्ग पर रंगई में बेतवा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। मंदिर में आम श्रद्धालुओं के साथ वीआईपी और राजनेता भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिस बल की तैनाती रहती है।

2005 की बाढ़ में पानी में डूबी रही गणेश प्रतिमा
‘श्री बाढ़ वाले गणेश’ मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी वर्ष 2005 की भीषण बाढ़ से जुड़ी है। जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र के कुछ युवाओं ने गणेश उत्सव के दौरान बेतवा नदी के किनारे मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की थी।
इसी दौरान इलाके में बाढ़ आ गई और पूजा पंडाल पूरी तरह पानी में डूब गया। बताया जाता है कि मिट्टी की गणेश प्रतिमा करीब 5 से 6 दिनों तक बेतवा नदी के पानी में डूबी रही।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद जब लोगों ने प्रतिमा को देखा तो वह सुरक्षित थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के बावजूद प्रतिमा के स्वरूप और बनावट में कोई खास नुकसान नहीं हुआ। श्रद्धालुओं ने इस घटना को भगवान गणेश का चमत्कार माना।
साधना सिंह ने लिया मंदिर निर्माण का संकल्प
बताया जाता है कि बाढ़ के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह वहां से गुजरी थीं। जलमग्न होने के बावजूद प्रतिमा को सुरक्षित देखकर उन्होंने इसे आस्था और चमत्कार से जोड़ते हुए यहां भव्य मंदिर बनवाने का संकल्प लिया।
इसके बाद वर्ष 2008 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। तभी से यहां स्थापित गणेश प्रतिमा को श्रद्धालु ‘श्री बाढ़ वाले गणेश’ के नाम से पूजते हैं।
गणेशोत्सव पर विशेष पूजा-अर्चना
गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में भगवान गणेश का विशेष अभिषेक और पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह और शाम महाआरती का आयोजन हो रहा है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में अखंड रामायण पाठ भी चल रहा है, जो अनंत चतुर्दशी तक जारी रहने की बात कही गई है।
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर मंदिर में विशेष हवन और पूजन का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा उनकी पत्नी साधना सिंह के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।