September 21, 2026

स्थानीय कृषि उपज मंडी में रविवार को कपास के उचित दाम नहीं मिलने से नाराज किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसानों ने नीलामी प्रक्रिया बीच में रुकवा दी और मंडी का मुख्य गेट बंद कर दिया। इसके चलते करीब एक घंटे तक कपास की खरीदी-बिक्री ठप रही।

किसानों ने कुछ व्यापारियों पर आपसी मिलीभगत कर कम भाव में कपास खरीदने का आरोप लगाया। बाद में मंडी सचिव के हस्तक्षेप और निष्पक्ष नीलामी का आश्वासन मिलने के बाद किसान शांत हुए और नीलामी दोबारा शुरू कराई गई।

100 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पहुंची कपास

रविवार को मंडी में कपास की बड़ी आवक हुई। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से किसान 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में करीब 200 से 250 क्विंटल कपास लेकर मंडी पहुंचे थे।

नीलामी शुरू होने के बाद व्यापारियों द्वारा लगाए जा रहे भाव को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई। देखते ही देखते किसानों और व्यापारियों के बीच बहस शुरू हो गई और किसानों ने नीलामी रुकवा दी।

व्यापारियों पर मिलीभगत का आरोप

किसान लाखन भावरे ने आरोप लगाया कि कुछ व्यापारी आपस में इशारों के जरिए बोली तय कर रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने मंडी कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि किसानों को लंबे समय तक धूप में खड़ा रखा जाता है, जबकि अंदर व्यापारियों के साथ कथित तौर पर सांठगांठ होती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अंजड़ मंडी में ज्यादा भाव मिलने का दावा

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिलाध्यक्ष अनिल असके ने दावा किया कि बड़वानी से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर अंजड़ मंडी में कपास का भाव 8,000 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है, जबकि बड़वानी मंडी में किसानों को करीब 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण इस वर्ष उत्पादन प्रभावित हुआ है। किसानों ने महंगे खाद-बीज और अन्य कृषि लागत के बीच फसल तैयार की है। ऐसे में उनका कहना है कि कपास का भाव कम से कम 10,000 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए।

असके ने मांग की कि समर्थन मूल्य से कम बोली लगाने वाले और मंडी के बाहर कथित रूप से अवैध खरीद करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

एक सप्ताह में भाव गिरने से किसान नाराज

कुकरा राजघाट के किसान हितेश ने बताया कि वह करीब 6 क्विंटल कपास लेकर मंडी पहुंचे थे। उनके अनुसार, पिछले सप्ताह इसी गुणवत्ता के कपास का भाव करीब 7,800 रुपये प्रति क्विंटल मिला था, जबकि इस बार भाव घटाकर करीब 6,800 रुपये बताया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि खराब गुणवत्ता वाले कपास के लिए करीब 6,100 रुपये का भाव लगाया गया। किसान का दावा है कि व्यापारियों ने बिना स्पष्ट कारण अचानक भाव कम कर दिए।

आश्वासन के बाद दोबारा शुरू हुई नीलामी

किसानों के हंगामे की सूचना के बाद मंडी सचिव ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की। सचिव ने निष्पक्ष तरीके से नीलामी कराने और किसानों की शिकायतों पर ध्यान देने का आश्वासन दिया।

इसके बाद किसानों ने प्रदर्शन समाप्त किया और मंडी में नीलामी प्रक्रिया दोबारा शुरू कराई गई। हालांकि, किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें उपज का उचित मूल्य और नीलामी में पारदर्शिता नहीं मिली तो वे दोबारा आंदोलन कर सकते हैं।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *