मध्य प्रदेश के दतिया में राजपरिवार की विवादित संपत्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आया है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया और सेंवढ़ा के ऐतिहासिक किलों समेत विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण पर रोक लगा दी है। यह रोक मामले की आगे होने वाली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।

निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे
दतिया राजपरिवार की विरासत से जुड़े संपत्ति विवाद में हेमंत सिंह और गिरिराज सिंह की ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। निचली अदालत से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
मामला करीब सात साल पुराना बताया जा रहा है। 14 नवंबर 2019 को संपत्तियों के अधिकार को लेकर दीवानी वाद शुरू हुआ था। इसके बाद 23 जून 2022 को विवादित संपत्तियों के संबंध में अंतरिम रोक लगाने के लिए आवेदन दिया गया था।
मार्च 2026 में निचली अदालत ने खारिज की थी अंतरिम राहत
दतिया की निचली अदालत ने मार्च 2026 में विवादित संपत्तियों को लेकर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अप्रैल में इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
दतिया-सेंवढ़ा के किलों समेत कई संपत्तियां विवाद में
विवाद केवल दतिया की संपत्तियों तक सीमित नहीं है। मामले में दतिया और सेंवढ़ा के ऐतिहासिक किलों के साथ ग्वालियर की संपत्तियों और पैतृक किले से जुड़े दावों का भी उल्लेख है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इन विवादित संपत्तियों के हस्तांतरण पर फिलहाल रोक रहेगी। हालांकि, संपत्तियों के वास्तविक अधिकार और स्वामित्व को लेकर अंतिम स्थिति आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
हाईकोर्ट की ओर से लगाई गई रोक फिलहाल विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण को प्रभावित करेगी। मामले में आगे होने वाली सुनवाई के दौरान संपत्तियों पर अधिकार और संबंधित पक्षों के दावों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश अंतिम स्वामित्व विवाद का फैसला नहीं है, बल्कि लंबित मामले के दौरान विवादित संपत्तियों के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक से जुड़ा है।