रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में आयोजित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह के सातवें दिन इंडियन आइडल फेम अमित साना की प्रस्तुति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए कुछ फिल्मी गानों को लेकर भाजपा के राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने आपत्ति जताई है। सांसद ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संस्कृति मंत्री को लिखित शिकायत करेंगे।

कथक प्रस्तुति के बाद अमित साना ने दी प्रस्तुति
41वें चक्रधर समारोह की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना और गुरु सोमा दास के मार्गदर्शन में श्री नटराज नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति दी। इसके बाद इंडियन आइडल फेम अमित साना अपने ग्रुप के साथ मंच पर पहुंचे।
अमित साना की प्रस्तुति के दौरान ‘बीड़ी जलाई ले, जिगर से पिया’ और ‘चुम्मा-चुम्मा दे दे’ जैसे लोकप्रिय फिल्मी गाने प्रस्तुत किए गए। इन्हीं गानों को लेकर सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने आपत्ति जताई है।
‘चक्रधर समारोह की गरिमा के अनुरूप नहीं’ : देवेंद्र प्रताप सिंह
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि वह कार्यक्रम के दौरान बीच में ही वापस लौट आए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय मंच के सामने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, उनकी पत्नी समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
सांसद ने इन गानों को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित आयोजन के मंच पर इस तरह की प्रस्तुति समारोह की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संस्कृति मंत्री को लिखित शिकायत की जाएगी। सांसद ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को मौखिक रूप से भी उठाएंगे।
समारोह की शुरुआत को लेकर भी उठे सवाल
चक्रधर समारोह को लेकर इससे पहले भी कुछ व्यवस्थाओं पर सवाल उठने की बात सामने आई है। आरोप है कि समारोह के शुभारंभ के दौरान राज्यपाल रमेन डेका के आगमन से पहले ही गणेश वंदना के बाद कार्यक्रम की शुरुआत कर दी गई थी।
इसके अलावा समारोह की दैनिक प्रस्तुतियों और दीप प्रज्वलन के क्रम को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं। अब अमित साना की प्रस्तुति में शामिल गानों को लेकर उठे विवाद ने आयोजन की व्यवस्थाओं और कार्यक्रमों के चयन को लेकर बहस को और बढ़ा दिया है।
सोशल मीडिया पर भी हुई आलोचना
अमित साना की प्रस्तुति के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने भी नाराजगी जाहिर की। फेसबुक पर कुछ यूजर्स ने चक्रधर समारोह जैसे शास्त्रीय कला और संस्कृति से जुड़े आयोजन में इन गानों के चयन पर सवाल उठाए।
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में कार्यक्रम की प्रस्तुति और कलाकार के चयन पर तंज कसा गया, जबकि कुछ लोगों ने समारोह की मूल सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की मांग की।
फिलहाल इस पूरे विवाद पर आयोजन समिति या जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कार्यक्रम में गानों के चयन का आधार और आयोजन समिति का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।