रायपुर। छत्तीसगढ़ की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में देशभर में पहचान मिली है। रामनामी समुदाय की आस्था, परंपरा और जीवनशैली पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (Best Documentary) का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। फिल्म का निर्देशन भारतबाला गणपति ने किया है।

गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘राम-नामी’ के लिए निर्देशक भारतबाला गणपति और फिल्म की टीम को सम्मानित किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस श्रेणी में फिल्म को रजत कमल और 2 लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया।
तन पर अंकित ‘राम’ आस्था की पहचान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की आस्था और साधना की अपनी विशिष्ट पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनामी समुदाय के लोगों के तन पर अंकित ‘राम’ महज अक्षर नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, साधना और समर्पण का प्रतीक है। समुदाय की इसी अनूठी परंपरा और जीवनशैली को डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने से छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। साथ ही यह सम्मान प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी प्रेरणादायी है।
निर्देशक भारतबाला गणपति समेत पूरी टीम को बधाई
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि के लिए निर्देशक भारतबाला गणपति और ‘राम-नामी’ की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा को देश के सामने रखने वाली यह फिल्म छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, 72वें संस्करण में वर्ष 2024 की भारतीय फिल्मों को सम्मानित किया गया है और ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र चुना गया है।