मऊगंज। फाइलों में योजनाएं पूरी, भुगतान भी पूरा, लेकिन जमीन पर नतीजे सवालों के घेरे में। मऊगंज के नईगढ़ी विकासखंड में जल जीवन मिशन के तहत करीब 3.85 करोड़ रुपये की योजना में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। खटखरी गांव में नवनिर्मित पानी की टंकी पहली टेस्टिंग के दौरान ही ढह गई। वहीं जांच में कुछ अन्य गांवों में भी योजना के काम और रिकॉर्ड में कथित अंतर सामने आया।

सामाजिक कार्यकर्ता कुंजबिहारी तिवारी की शिकायत के बाद मामले की करीब छह महीने तक जांच की गई। जांच के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने PHE के तत्कालीन अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की है।
2021 में शुरू हुई थी योजना, 9 महीने में पूरा होना था काम
मामला वर्ष 2021 में शुरू हुई जल जीवन मिशन की योजना से जुड़ा है। नईगढ़ी विकासखंड के विभिन्न गांवों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने के लिए पानी की टंकी, पाइपलाइन, पंप हाउस, सबमर्सिबल मोटर और घरेलू नल कनेक्शन का काम प्रस्तावित था।
निर्धारित समय के मुताबिक परियोजना को करीब नौ महीने में पूरा किया जाना था। आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी कई स्थानों पर काम अधूरा रहा, जबकि योजना के लिए 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
शिकायत के बाद जब योजना के कामों की जमीनी स्थिति की जांच की गई, तो कई स्तरों पर कथित अनियमितताएं सामने आईं।
खटखरी में पहली टेस्टिंग में ढह गई पानी की टंकी
जांच के दौरान खटखरी गांव की नवनिर्मित पानी की टंकी का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में आया। आरोप है कि टंकी में पहली बार टेस्टिंग के लिए पानी भरा गया तो निर्माण में कथित खामियों के चलते टंकी भरभरा कर ढह गई।
घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और उसकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों के लिए बनाई गई करोड़ों रुपये की योजना का यह हाल सामने आने के बाद शिकायत की जांच आगे बढ़ी।
कहीं मोटर कम मिली तो कहीं नल कनेक्शन का दावा निकला गलत
जांच में अन्य गांवों में भी योजना के काम और दस्तावेजों के बीच कथित अंतर सामने आने की बात कही गई है।
- करह उर्फ खैरागढ़: रिकॉर्ड में पांच मोटर पंप दर्ज होने की बात सामने आई, जबकि मौके पर एक ही सबमर्सिबल मोटर मिलने का आरोप है। वहीं 740 घरेलू नल कनेक्शन का दावा भी जांच में सवालों के घेरे में आया।
- शिवराजपुर: यहां ओवरहेड टैंक और सम्पवेल का काम लंबे समय बाद भी अधूरा पाए जाने की बात कही गई।
- जुड़मनिया रघुनाथ: आरोप है कि मुख्य पाइपलाइन का काम गांव के एक हिस्से तक ही किया गया, जबकि भुगतान पूरा कर दिया गया।
इन कथित अनियमितताओं के चलते योजना का उद्देश्य यानी ग्रामीण परिवारों तक नियमित पेयजल पहुंचाना प्रभावित होने की बात सामने आई है।
शिकायत के बाद छह महीने चली जांच
सामाजिक कार्यकर्ता कुंजबिहारी तिवारी ने योजना में कथित गड़बड़ियों और घटिया निर्माण को लेकर शिकायत की थी। इसके बाद EOW ने मामले की प्राथमिक जांच की। करीब छह महीने चली जांच के बाद एजेंसी ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की है।
EOW ने इन लोगों के खिलाफ दर्ज की FIR
EOW के मुताबिक मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE) जे.पी. द्विवेदी, सहायक यंत्री (AE) संजय पाण्डेय, उपयंत्री (Sub-Engineer) ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी को आरोपी बनाया गया है।
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब जांच के दौरान भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों की वास्तविक स्थिति समेत अन्य पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
पांच साल बाद भी ग्रामीणों के सामने पानी का सवाल
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण घरों तक नल के जरिए पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में यदि योजना के तहत भुगतान होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम अधूरा या मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो इसका सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है जिनके लिए योजना बनाई गई थी।
फिलहाल EOW की FIR के बाद जांच आगे बढ़ेगी। अब यह देखना अहम होगा कि जांच में कथित अनियमितताओं के लिए किसकी क्या भूमिका सामने आती है और सरकारी राशि के इस्तेमाल को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।