शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में छात्रावासों की व्यवस्थाओं में लापरवाही और उदासीनता को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद दो छात्रावास अधीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो कर्मचारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई है। इसके अलावा सात कर्मचारियों और अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह कार्रवाई छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की शिकायतों और प्रशासन तक पहुंची समस्याओं के बाद की गई है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश पर जनजातीय कार्य विभाग की ओर से छात्रावासों और आश्रमों का निरीक्षण कराया गया था। निरीक्षण में लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की है।
दो छात्रावास अधीक्षक निलंबित
जारी आदेश के अनुसार, आदिवासी बालक छात्रावास आमडीह, जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अधीक्षक प्रकाश सिंह को मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के विपरीत आचरण के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जयसिंहनगर निर्धारित किया गया है।
इसी तरह जनजातीय बालक आश्रम गजवाही के अधीक्षक बुद्धशेन सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उनका मुख्यालय भी निलंबन अवधि में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जयसिंहनगर निर्धारित किया गया है।
दोनों निलंबित अधीक्षकों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
दो कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकी
प्रशासन ने कार्रवाई के तहत जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास चुहिरी के मुंशी सिंह और जनजातीय बालक आश्रम बरदौहा के अमर बहादुर सिंह की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए हैं।
यह कार्रवाई छात्रावासों और आश्रमों की व्यवस्थाओं में सामने आई लापरवाही के आधार पर की गई है।
सात कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस
इसके अलावा सात कर्मचारियों और अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस पाने वालों में किरण सिंह, रामावतार सिंह, प्रतिमा चौधरी, राकेश पटेल, गणेश दत्त नामदेव, शारदा नापित और बालक क्रीड़ा परिषद शहडोल के अधीक्षक शामिल हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने निरीक्षण में सामने आई कमियों के आधार पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से जवाब मांगा है।
छात्रावासों से जुड़ी शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई से संकेत है कि प्रशासन छात्रावासों में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं की निगरानी को लेकर सख्ती बरत रहा है।