November 7, 2026

जबलपुर। छिंदवाड़ा जिले के परासिया में हुए चर्चित कफ सिरप मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले के आरोपी डॉक्टर प्रवीण कुमार सोनी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR और पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट को चुनौती देते हुए मामला रद्द करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में 27 बच्चों की मौत हुई है। इसके बाद अदालत ने याचिका पर आगे की सुनवाई से पहले मृत बच्चों के अभिभावकों को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। इसके बाद डॉक्टर की ओर से याचिका वापस लेने का आवेदन पेश किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

27 बच्चों के अभिभावकों को पक्षकार बनाने का निर्देश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष मृत बच्चों के माता-पिता को इस मामले का प्रभावित पक्ष बताया। सरकार की दलील के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका की आगे की प्रक्रिया से पहले सभी 27 मृत बच्चों के अभिभावकों को पक्षकार बनाया जाए।

अदालत के इस निर्देश के बाद डॉक्टर प्रवीण सोनी की ओर से उनके बड़े भाई अयोध्या प्रसाद सोनी ने शपथ पत्र के साथ याचिका वापस लेने का आवेदन पेश किया। कोर्ट ने आवेदन स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

हालांकि, डॉक्टर की ओर से भविष्य में कानून के अनुसार नई याचिका दायर करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।

FIR और चार्जशीट को दी थी चुनौती

डॉ. प्रवीण सोनी ने BNSS की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर परासिया थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 296/2025 को चुनौती दी थी। याचिका में FIR के साथ पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट पर भी सवाल उठाए गए थे।

याचिका में BNS की धारा 105 के तहत लगाए गए गैर-इरादतन हत्या के आरोप को हटाने की मांग की गई थी। डॉक्टर की ओर से यह तर्क दिया गया था कि मामला इलाज के दौरान हुई कथित चिकित्सकीय अनहोनी से जुड़ा है और इसे BNS की धारा 106 के तहत देखा जाना चाहिए।

इसके अलावा BNS की धारा 276, 238, 336(3), 3(5) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 27(a) को भी चुनौती दी गई थी।

डॉक्टर की ओर से क्या दी गई थी दलील?

डॉ. प्रवीण सोनी की ओर से याचिका में कहा गया था कि उन्होंने बच्चों का इलाज पूरी सद्भावना और चिकित्सकीय जिम्मेदारी के साथ किया। उन्होंने दवा में मिलावट करने या सबूत मिटाने से जुड़े आरोपों से इनकार किया था।

फरवरी 2026 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉ. प्रवीण सोनी समेत मामले से जुड़े कुछ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई की थी। उपलब्ध हाईकोर्ट रिकॉर्ड में कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की मात्रा से संबंधित सरकारी प्रयोगशाला और ड्रग विभाग की रिपोर्ट का उल्लेख है।

याचिका वापस लेने से आपराधिक मामला खत्म नहीं

डॉ. प्रवीण सोनी की हाईकोर्ट याचिका वापस लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला समाप्त हो गया है। याचिका FIR और चार्जशीट को चुनौती देने से संबंधित थी। इसे वापस लेने के बाद मूल आपराधिक कार्यवाही अपने कानूनी क्रम में आगे बढ़ सकती है।

अब मामले की आगे की कार्यवाही निचली अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड, चार्जशीट और कानून के अनुसार होगी। वहीं, मृत बच्चों के परिवारों की भूमिका भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगी।

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