बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के चर्चित किरनापुर थाना मामले में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस हिरासत में कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायत करने वाली सावित्री चौधरी की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में उनका गर्भपात हो गया। परिजनों ने इसके लिए पुलिसकर्मियों पर मारपीट और कथित अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया है। हालांकि, गर्भपात का पुलिस कार्रवाई से सीधा चिकित्सीय संबंध अभी जांच का विषय है।

मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। SIT ने महिला को थाने में रखने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन समेत कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही है।
करीब छह साल बाद मां बनने की उम्मीद, फिर बिगड़ी तबीयत
पीड़िता के पति कैलाश चौधरी और परिजनों के मुताबिक, उनकी शादी वर्ष 2020 में हुई थी। करीब छह साल के इंतजार के बाद सावित्री गर्भवती हुई थीं। परिजनों का आरोप है कि किरनापुर थाने में पूछताछ के दौरान उनके साथ कथित रूप से मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई।
22 सितंबर की शाम अत्यधिक रक्तस्राव और पेट दर्द की शिकायत के बाद सावित्री को जिला अस्पताल, बालाघाट में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार जांच के दौरान गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिली और अधिक रक्तस्राव के चलते चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत गर्भपात करना पड़ा।
परिजनों ने इस घटना के लिए पुलिस की कथित मारपीट को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और गर्भपात के बीच चिकित्सीय कारणात्मक संबंध की अंतिम पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी।
बीजेपी जिलाध्यक्ष और समाज ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी सामने आने के बाद मरार माली समाज के प्रदेश अध्यक्ष और बीजेपी जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे जिला अस्पताल पहुंचे और पीड़िता तथा उनके परिजनों से मुलाकात की।
उन्होंने मामले पर चिंता जताते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। समाज की ओर से गर्भपात को लेकर भी आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग उठाई गई है। हालांकि, इस मांग पर अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
SIT जांच में पुलिस कार्रवाई में मिलीं कई अनियमितताएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया था। जांच टीम ने मामले से जुड़े कानूनी, चिकित्सकीय, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक 49 से अधिक लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। SIT ने 22 सितंबर को अपनी रिपोर्ट पुलिस विभाग को सौंपी।
जांच में महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रोके रखने, रोजनामचे में प्रविष्टि में देरी और सूर्यास्त के बाद महिला को हिरासत में लेने की प्रक्रिया में नियमों के पालन में कमी जैसे तथ्य सामने आए।
रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई दामेंद्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
पुलिस हिरासत मामले में पहले ही हो चुका था निलंबन
सावित्री और उनके पति कैलाश की शिकायत सामने आने के बाद संबंधित चार पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका था। आरोप था कि चोरी के मामले में पूछताछ के लिए दंपती को थाने लाया गया और उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। बाद में मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित की गई थी।
SIT की रिपोर्ट के बाद अब निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
गर्भपात को लेकर मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
किरनापुर मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सावित्री की तबीयत बिगड़ने और गर्भपात के पीछे चिकित्सकीय कारण क्या रहे। परिजनों ने पुलिस मारपीट को इसका कारण बताया है, जबकि पुलिस कार्रवाई और गर्भपात के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए मेडिकल साक्ष्य और आगे की विवेचना जरूरी होगी।
इसलिए फिलहाल मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज FIR और SIT द्वारा पाई गई प्रक्रियात्मक अनियमितताएं अलग विषय हैं, जबकि गर्भपात के कारण और उसके लिए किसी की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।