बिलासपुर। आबकारी विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक को विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में सर्विस रिकॉर्ड (ACR) के कम अंक देकर अनुत्तीर्ण किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद निर्धारित समयसीमा में मामले पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को अवमानना नोटिस जारी किया गया है।

कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
विभागीय परीक्षा में ACR के 15 अंक कम देने का आरोप
मामला बिलासपुर के महर्षि स्कूल रोड निवासी मुकेश कुमार शर्मा से जुड़ा है। वे जांजगीर-चांपा जिले में आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने आबकारी उपनिरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) पद के लिए आयोजित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लिया था।
याचिका के अनुसार, सर्विस रिकॉर्ड यानी ACR के 15 अंक कम दिए जाने के कारण वे परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
2017 से 2019 के ACR को लेकर उठाया सवाल
याचिका में कहा गया कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने से पहले याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि इन प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर सर्विस रिकॉर्ड के अंक कम किए गए, जिसका सीधा असर विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम पर पड़ा।
हाईकोर्ट ने 90 दिन में पुनर्विचार का दिया था आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्याय दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए संबंधित ACR के आधार पर की गई कार्रवाई को उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना।
इसके बाद कोर्ट ने संबंधित मामले पर अन्य ACR के आधार पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए अधिकारियों को 90 दिनों की समय-सीमा दी गई थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के मुताबिक, दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट का आदेश आने के बावजूद निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया।
करीब 9 महीने बाद दायर हुई अवमानना याचिका
निर्धारित समय बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट का रुख किया और अवमानना याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि न्यायालय के आदेशों का समय पर पालन नहीं होने के कारण अधिकारियों के खिलाफ बार-बार अवमानना याचिकाएं दायर करनी पड़ रही हैं। इससे न्यायालय का महत्वपूर्ण समय ऐसे मामलों की सुनवाई में खर्च होता है और अन्य मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो सकती है।
आबकारी कमिश्नर और अपर आयुक्त को अवमानना नोटिस
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को अवमानना नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के आदेश का निर्धारित समय में पालन नहीं किए जाने पर उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
अब मामले में अधिकारियों के जवाब और कोर्ट के अगले आदेश पर नजर रहेगी।