November 6, 2026

मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार अगले दो से तीन वर्षों में अवैध मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग के प्रतिनिधियों के साथ पुलिसकर्मी भी शामिल होंगे।

मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने मंत्रालय में आयोजित पांचवीं राज्य स्तरीय नार्कोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) बैठक में अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

ड्रग नेटवर्क खत्म करने के लिए तीन साल की कार्ययोजना

मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि जिस तरह प्रदेश में नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए अभियान चलाया गया, उसी गंभीरता से अवैध मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए काम करना होगा।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों को तीन साल के विशेष अभियान के लिए अपने आंतरिक लक्ष्य तय करने और कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। साथ ही ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने और नार्कोटिक्स वर्टिकल, स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) तथा स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।

दो साल में 2.74 लाख किलो मादक पदार्थ नष्ट

बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2025 और 2026 में 30 सितंबर तक कुल 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए।

  • वर्ष 2025: 2,073 प्रकरणों में 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए।
  • वर्ष 2026 (30 सितंबर तक): 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनिष्टीकरण किया गया।

इसके अलावा, 30 सितंबर 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से कुल 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए।

नशामुक्त विद्यालय अभियान चलेगा, सूचना देने वालों की पहचान रहेगी गोपनीय

मुख्य सचिव ने सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए। 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग समितियां बनाई जाएंगी। इनमें स्थानीय पुलिस थाने का बीट इंचार्ज नोडल अधिकारी रहेगा।

समितियों के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही ऐसा सूचना तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें नशे से जुड़े मामलों की जानकारी देने वाले विद्यार्थी, शिक्षक और अन्य लोगों की पहचान गोपनीय रखी जा सके।

मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने के लिए नार्कोटिक्स विभाग की हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया है।

हर जिले में नशामुक्ति केंद्र खोलने की तैयारी

बैठक में बताया गया कि फिलहाल सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। मुख्य सचिव ने सामाजिक न्याय विभाग को उन जिलों से 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव प्राप्त करने के निर्देश दिए, जहां अभी नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं। लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी जिलों में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएं।

18 गुप्त ड्रग लैब ध्वस्त, 811 शिकायतें मिलीं

बैठक में बताया गया कि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का मानस पोर्टल और हेल्पलाइन 1933 मादक पदार्थों से जुड़ी गुप्त सूचनाएं प्राप्त करने का माध्यम है। वर्ष 2025-2026 के दौरान प्रदेश में इस माध्यम से कुल 811 शिकायतें प्राप्त हुईं।

इसी अवधि में मध्यप्रदेश पुलिस, NCB, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नार्कोटिक्स (CBN) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्रदेश में 18 अवैध मादक पदार्थ प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया।

NDPS मामलों में 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई भी की गई है।

  • वर्ष 2025: NDPS के 54 मामलों में 300 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई।
  • वर्ष 2026: 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई।

इस तरह कुल 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई हुई है। सितंबर 2026 तक NDPS के 201 विशेष ट्रायल मामलों की निगरानी की जा रही थी। इस अवधि में अदालतों में लंबित मामलों में से 8 में दोषसिद्धि हुई।

केमिकल फैक्ट्रियों और कोडीन कफ सिरप पर भी निगरानी

मुख्य सचिव ने उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को केमिकल फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए संयुक्त कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। इसके लिए औद्योगिक क्लस्टर्स और एसोसिएशनों की सूची साझा करने तथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निगरानी तंत्र या विशेष दस्ता बनाने को कहा गया।

कोडीन आधारित कफ सिरप जैसी दवाओं की आपूर्ति और वितरण पर लगातार निगरानी रखने के साथ लाइसेंस प्रक्रिया को कंप्यूटरीकृत करने के निर्देश भी दिए गए। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर कोडीन आधारित कफ सिरप के उत्पादन और प्रदेश में वितरण नेटवर्क की जानकारी जुटाने को कहा गया।

इसके अलावा, मुख्य सचिव ने FSL को NDPS एक्ट के तहत भेजे जाने वाले सैंपल की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

नशे से दूरी है जरूरी अभियान में 2.58 करोड़ लोगों की भागीदारी

बैठक में नशामुक्ति के लिए चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ जागरूकता के लिए 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया।

‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर 58 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। इसके अलावा, करीब 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा गया।

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