November 5, 2026

इंदौर। महाकुंभ से चर्चा में आईं मोनालिसा भोंसले के जन्म प्रमाण पत्र और फरमान से उनकी शादी से जुड़े विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत मोनालिसा का पहला जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर उनकी जन्मतिथि में बदलाव किया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र को रद्द करने या उसमें बदलाव करने से पहले मोनालिसा को प्रभावी रूप से सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी था। हालांकि, कोर्ट ने उनकी वास्तविक जन्मतिथि को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। जन्मतिथि का विवाद फरमान के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले से भी जुड़ा हुआ है।

जन्म प्रमाण पत्र में दो अलग-अलग जन्मतिथियों का विवाद

मामला मोनालिसा भोंसले के जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज जन्मतिथि को लेकर है। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2025 में जारी पहले जन्म प्रमाण पत्र में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। इस प्रमाण पत्र के समर्थन में उनकी मां का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि उनके आधार कार्ड में इसी तारीख का उल्लेख था।

बाद में अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर उनकी जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज की गई और पहले जन्म प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया। इसी कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

सुनवाई का अवसर दिए बिना प्रमाण पत्र रद्द करने पर सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि पहले जन्म प्रमाण पत्र को रद्द करने से पहले मोनालिसा को अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर दिया जाना चाहिए था।

इसी आधार पर कोर्ट ने वह आदेश निरस्त कर दिया, जिसके जरिए उनका पहला जन्म प्रमाण पत्र रद्द किया गया था। कोर्ट के फैसले का दायरा जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने की प्रक्रिया तक सीमित है।

हाईकोर्ट ने वास्तविक जन्मतिथि पर नहीं दिया अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह तय नहीं किया है कि मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 है या 30 दिसंबर 2009। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जन्मतिथि के विवाद का कानून के अनुसार नए सिरे से निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं।

ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र की वैधानिक स्थिति तय करने के लिए आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जन्मतिथि का अंतिम निर्धारण फरमान से हुई शादी से जुड़े कानूनी विवाद के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

फरमान के खिलाफ दर्ज अपहरण केस में उम्र का सवाल अहम

मोनालिसा की जन्मतिथि को लेकर विवाद का सीधा संबंध फरमान से उनकी शादी के समय उनकी उम्र से है। यदि 30 दिसंबर 2009 की जन्मतिथि मान्य होती है, तो शादी के समय उनके नाबालिग होने का सवाल उठता है। वहीं, 1 जनवरी 2008 की जन्मतिथि के आधार पर उनकी उम्र बालिग मानी जाती है।

इसी मामले में मोनालिसा के पिता की शिकायत पर फरमान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने इसे अपहरण का मामला बताया था।

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जन्म प्रमाण पत्र की वैधानिक स्थिति और फरमान के खिलाफ दर्ज मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मोनालिसा की ओर से अधिवक्ता जेरी लोपेज ने कानूनी पक्ष रखा।

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