मध्य प्रदेश के जबलपुर में कथित अवैध खनन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने मेसर्स पैसिफिक एक्सपोर्ट की रिट याचिका खारिज कर दी है। यह मामला भाजपा विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कलेक्टर को कार्रवाई करने का अधिकार है और याचिकाकर्ता को अपना पक्ष कलेक्टर के समक्ष रखना चाहिए।

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच में हुई। अदालत ने माना कि इस स्तर पर रिट याचिका दायर करना जल्दबाजी थी, क्योंकि कलेक्टर की ओर से अभी केवल कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। खनन कारोबारी पर किसी अंतिम देयता का निर्धारण नहीं हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के ग्राम झींथी में आयरन ओर खनन से जुड़ा है। याचिका में 10,89,860 मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्खनन किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
इस मामले में करीब 81.73 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया था। मेसर्स पैसिफिक एक्सपोर्ट ने इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कलेक्टर को ऐसे मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार है। चूंकि फिलहाल कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और अभी अंतिम देयता तय नहीं हुई है, इसलिए इस स्तर पर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करना समय से पहले की गई कार्रवाई है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया कि वह कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले में जवाब दे।
अभी अंतिम देयता तय नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कारण बताओ नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित पक्ष पर वसूली की अंतिम जिम्मेदारी तय हो गई है। मामले में आगे की कार्रवाई कलेक्टर के स्तर पर होने वाली प्रक्रिया और याचिकाकर्ता के पक्ष को सुनने के बाद होगी।
इस तरह, याचिका खारिज होने के बावजूद कथित अतिरिक्त उत्खनन और 81.73 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़े मामले में अंतिम निर्णय होना बाकी है।