मामला क्या था?
- दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षिका Apeksha Pathak ने याचिका दायर की थी।
- उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें प्रोबेशन के दौरान:
- पहले वर्ष 70% वेतन,
- दूसरे वर्ष 80% वेतन,
- तीसरे वर्ष 90% वेतन देने का प्रावधान था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
- अदालत ने कहा कि नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक्त प्रोबेशनरी कर्मचारी पद के न्यूनतम वेतनमान के अनुसार 100% वेतन पाने के अधिकारी हैं।
- यदि कर्मचारी नियमित कर्मचारियों की तरह समान कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें कम वेतन देने का उचित कानूनी आधार नहीं है।
- कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता का प्रोबेशन अवधि का बकाया (एरियर) निकालकर 90 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।
सरकार की दलील
- राज्य सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया, लेकिन अदालत ने कहा कि इस कानूनी प्रश्न पर पहले भी निर्णय दिए जा चुके हैं और कम वेतन देने का पर्याप्त वैधानिक आधार नहीं है।
इस फैसले का प्रभाव
यदि यह निर्णय आगे भी लागू रहता है और उस पर रोक नहीं लगती, तो:
- मध्य प्रदेश के नियमित रूप से नियुक्त प्रोबेशनरी सरकारी कर्मचारियों को 100% वेतन का लाभ मिल सकता है।
- जिन कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में 70%, 80% या 90% वेतन मिला था, वे परिस्थितियों के अनुसार एरियर का दावा कर सकते हैं।
- राज्य सरकार को अपनी वेतन संबंधी नीति में बदलाव करना पड़ सकता है।