September 13, 2026

उज्जैन। मध्यप्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण के बीच 170 साल पुराने ऐतिहासिक श्री खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद गहरा गया है। कंठाल चौराहे से सती गेट होते हुए छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण की जद में आए मंदिर पर कार्रवाई के दौरान नगर निगम की टीम ने मंदिर के कुछ हिस्से हटाए, लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा को हटाने की कोशिश में प्रशासन को मुश्किल का सामना करना पड़ा।

बताया गया कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम ने हस्तक्षेप किया। विभाग की प्रारंभिक जांच के बाद विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि प्रतिमा को हिलाने या निकालने की कोशिश से उसमें दरार आ सकती है। इसके बाद प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने को लेकर स्थिति पेचीदा हो गई है।

प्रतिमा हटाने में आई मुश्किल, पुरातत्व विभाग ने जताई चिंता

मंदिर पर कार्रवाई के दौरान जब मुख्य प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया गया तो टीम इसे हिला नहीं सकी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का दावा है कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।

वहीं पुरातत्व विभाग की ओर से प्रतिमा को संभावित नुकसान को लेकर जताई गई आशंका के बाद प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के बीच प्राचीन प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे विस्थापित किया जाए।

हालांकि प्रतिमा के “न हिलने” को लेकर स्थानीय श्रद्धालु इसे बजरंगबली का चमत्कार भी बता रहे हैं। यह श्रद्धालुओं की आस्था और स्थानीय लोगों की मान्यता है।

मंदिर हटाने को लेकर श्रद्धालुओं में आक्रोश

कार्रवाई की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग मंदिर परिसर के आसपास पहुंच गए। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है।

कार्रवाई के दौरान कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। पुजारियों और हिंदूवादी संगठनों ने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने की मांग की है।

सिंहस्थ 2028 के लिए हो रहा सड़क चौड़ीकरण

दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से सती गेट होते हुए छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत सड़क की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों को हटाया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर बताया गया है कि इससे पहले भी कुछ धार्मिक स्थलों को हटाकर उन्हें दूसरे स्थानों पर स्थापित किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत खड़े हनुमान मंदिर को भी हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

30 अगस्त को विरोध के बाद रोकनी पड़ी थी कार्रवाई

इससे पहले 30 अगस्त को बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और स्थानीय नागरिकों ने मंदिर हटाने का विरोध किया था। विरोध के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए कार्रवाई का विरोध किया।

प्रदर्शन के कारण शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और जाम की स्थिति बनी। विरोध को देखते हुए उस समय प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी थी।

BJP पार्षद बोले- विकास के साथ हैं, लेकिन प्रतिमा को जबरदस्ती न हटाएं

भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने कहा कि वे सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक मंदिर के अन्य हिस्सों को हटाने में भी कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन मुख्य प्रतिमा को हटाने के प्रयास पर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिमा को हटाने के लिए टीम कई बार आई, लेकिन उसे हिलाया तक नहीं जा सका। पार्षद का कहना है कि जब प्रतिमा को लेकर तकनीकी और धार्मिक दोनों तरह की आपत्तियां हैं, तो प्रशासन को जबरदस्ती कार्रवाई करने के बजाय समाधान तलाशना चाहिए।

हिंदूवादी नेता बोले- विकास के साथ हैं, विनाश नहीं होने देंगे

हिंदूवादी नेता शैलेन्द्र यादव के अनुसार मंदिर को हटाने और विस्थापन को लेकर प्रशासन के साथ कई दौर की बैठकें और समन्वय की कोशिशें हुई हैं। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने में प्रशासन सफल नहीं हो पाया है और अब विशेषज्ञों की मदद से रास्ता तलाशना चाहिए।

वहीं हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने कहा कि वे विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रतिमा के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे आस्था का विषय बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर धार्मिक विरासत को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

भक्तों का दावा- करीब 10 दिनों से चल रही विस्थापन प्रक्रिया

श्रद्धालु मोनू शुक्ला के अनुसार खड़े हनुमान मंदिर को विस्थापित करने की प्रक्रिया करीब 10 दिनों से चल रही है। उनका दावा है कि इस दौरान कई प्रयास किए गए और मंदिर की दिशा में भी बदलाव किया गया है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के इन दावों पर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर अब प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण के साथ प्राचीन प्रतिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। एक तरफ सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए विकास कार्य आगे बढ़ाने हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था और पुरातत्व विभाग द्वारा जताई गई संभावित क्षति की आशंका को भी ध्यान में रखना होगा।

फिलहाल प्रतिमा के सुरक्षित विस्थापन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और विशेषज्ञों की राय पर टिकी है।

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