September 15, 2026

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में अकादमिक गुणवत्ता, शोध, विकास और विद्यार्थियों के शैक्षणिक उन्नयन पर जोर दिया। राज्यपाल ने AI एवं मीडिया रिसर्च सेंटर और नवपरिवर्तित सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके साथ बिताए अनुभवों एवं प्रेरणादायी प्रसंगों को भी साझा किया।

सुदूर अंचल की छात्राओं को मिलेगा लाभ

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि नारी शिक्षा, उत्थान और सशक्तीकरण के लिए अनुकरणीय योगदान देने वाली सावित्रीबाई फुले की स्मृति में कन्या छात्रावास का नामकरण किया गया है।

उन्होंने कहा कि छात्रावास की सुविधाओं से छत्तीसगढ़ के दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को मीडिया शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी और वे अपने करियर में आगे बढ़ सकेंगी।

AI और मीडिया रिसर्च सेंटर का शुभारंभ

सूचना-संचार प्रौद्योगिकी के तेजी से बदलते दौर में मीडिया रिसर्च को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से मधुकर खेर मल्टीमीडिया भवन में AI एवं मीडिया रिसर्च सेंटर स्थापित किया गया है।

राज्यपाल ने इसका शुभारंभ किया। सूचना प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने राज्यपाल को केंद्र की अकादमिक और शोध गतिविधियों की जानकारी दी।

‘इस साल एडमिशन में 50 प्रतिशत की वृद्धि’

विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस सभाकक्ष में राज्यपाल का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि पिछले अकादमिक सत्र की तुलना में इस वर्ष विश्वविद्यालय में प्रवेश संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का संकेत है। कुलपति ने विश्वविद्यालय के कार्यों के लिए ‘ट्रांसफॉर्मेशन विदाउट ट्रांजैक्शन’ यानी न्यूनतम संसाधनों में अधिकतम परिवर्तन का मंत्र बताया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छोटा जरूर है, लेकिन ‘लघुता में भव्यता’ के सिद्धांत पर काम कर रहा है। इसके तीन प्रमुख संकल्प हैं—हर छात्र हुनरमंद होगा, हर छात्र संस्कारयुक्त होगा और विश्वविद्यालय की हर गतिविधि में ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव रहेगा।

राज्यपाल ने मीडिया विद्यार्थियों को दी पत्रकारिता की सीख

मीडिया विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि पत्रकारिता के छात्रों के कंधों पर समाज ने सत्य को सामने लाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मीडिया शिक्षा के दौरान पत्रकारिता को प्रभावित करने वाली शक्तियों, TRP और विज्ञापन के दबाव जैसी चुनौतियों का गंभीरता से अध्ययन करें। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट और नकारात्मक खबरों को लेकर भी पत्रकारिता के विद्यार्थियों को अपनी जिम्मेदारी समझने की सलाह दी।

राज्यपाल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, AI और सोशल मीडिया के दौर में भी प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता बनी हुई है।

‘फ्रीडम ऑफ स्पीच के मानकों का रखें ध्यान’

रमेन डेका ने कहा कि समाज में मूल्यों और प्रतिमानों में कमी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में पत्रकारिता और मीडिया के विद्यार्थियों के लिए फ्रीडम ऑफ स्पीच के मानकों को समझना जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य के पेशेवर जीवन में आने वाली चुनौतियों का साहस के साथ सामना करने और आवश्यकतानुसार सेल्फ-सेंसर का भी प्रयोग करने की सलाह दी।

राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1900 में पंडित माधवराव सप्रे ने ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का प्रकाशन किया था। उन्होंने कहा कि आज मीडिया का युग है और इस चुनौतीपूर्ण पेशे में आने वाले विद्यार्थियों का लक्ष्य जनता और समाज के सत्य को सामने लाना होना चाहिए।

‘समाज के अनसंग हीरोज की कहानियां सामने लाएं’

राज्यपाल ने असम के एक पत्रकार का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें समाज के ‘अनसंग हीरोज’ यानी ऐसे लोगों की कहानियां भी सामने लानी चाहिए, जो बिना किसी प्रचार के समाज के लिए महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में कुलपति डॉ. मनोज दयाल ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष मंडावी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने किया।

इस अवसर पर लोक भवन के अधिकारी, विभागाध्यक्ष, एसोसिएट प्रोफेसर पंकज नयन पाण्डेय, डॉ. शाहिद अली, डॉ. राजेंद्र मोहंती, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

बहुभाषी समाचार पत्र संग्रहालय की प्रदर्शनी

विश्वविद्यालय के ग्रंथालय में ‘नारायणी बहुभाषी समाचार पत्र संग्रहालय’ के तहत विभिन्न भाषाओं की पत्र-पत्रिकाओं के संकलनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। साहित्यकार डॉ. मृणालिका-राजेंद्र ओझा ने इन संकलनों को प्रदर्शित किया।

प्रदर्शनी का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा के संयोजन में किया गया।

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