November 4, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के करीब 90 बड़े निजी अस्पतालों को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (NABH) का वैध एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के लिए अंतिम 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है।

विभाग के आदेश के अनुसार, जिन अस्पतालों के पास वैध NABH एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती कर इलाज देने से रोक दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने की जानकारी दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से चारों महानगरों के निजी अस्पताल संचालकों में हलचल मच गई है। इसका उद्देश्य आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

1 अक्टूबर से लागू हुई थी NABH सर्टिफिकेट की अनिवार्यता

राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए NABH एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता लागू की थी। इसके बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों को अंतिम समयसीमा दी है।

NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों के पालन का आकलन करने की व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे में योजना के तहत इलाज देने वाले अस्पतालों के लिए इस प्रमाणन की शर्त को पूरा करना महत्वपूर्ण हो गया है।

पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर पर कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के पहले चरण में प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों के निजी अस्पतालों को शामिल किया गया है।

  • भोपाल: आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पताल
  • इंदौर: सूचीबद्ध अस्पतालों में NABH प्रमाणन की जांच
  • जबलपुर: निर्धारित मानक पूरे करने पर जोर
  • ग्वालियर: प्रमाणपत्र नहीं होने पर नए मरीजों के इलाज पर रोक

इन शहरों के करीब 90 अस्पतालों को प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए 24 घंटे की अंतिम समयसीमा दी गई है। जिन अस्पतालों के पास वैध प्रमाणपत्र नहीं है, वहां आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।

दूसरे चरण में अन्य जिलों तक पहुंचेगी कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग की योजना के मुताबिक, अगले चरण में प्रदेश के अन्य जिलों के अस्पतालों को भी इस नियम के दायरे में लाया जाएगा। अब किसी नए जनरल अस्पताल को वैध NABH प्रमाणपत्र के बिना आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध नहीं किए जाने की व्यवस्था बताई गई है।

इस कदम से अस्पतालों को गुणवत्ता संबंधी मानकों और प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी करने पर ध्यान देना होगा। हालांकि, अलग-अलग अस्पतालों की स्थिति और प्रमाणपत्र की वैधता के आधार पर आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।

जनजातीय क्षेत्रों के अस्पतालों को फिलहाल अस्थायी राहत

स्वास्थ्य विभाग ने जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वहां स्थित अस्पतालों को फिलहाल इस सख्त नियम से अस्थायी राहत दी है।

इस छूट का उद्देश्य दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में मरीजों का इलाज प्रभावित होने से रोकना है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पतालों के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

निजी अस्पतालों में बढ़ी हलचल, मरीजों पर क्या होगा असर?

NABH प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और नए मरीजों की भर्ती पर रोक के आदेश से चारों महानगरों के निजी अस्पतालों में हलचल बढ़ गई है। अब अस्पतालों के सामने निर्धारित समयसीमा में प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की चुनौती है।

मरीजों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि संबंधित अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों का इलाज उपलब्ध है या नहीं। इलाज के लिए जाने से पहले अस्पताल और योजना की मौजूदा स्थिति की पुष्टि करना उचित रहेगा।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का आगे क्या असर होगा, यह अस्पतालों के प्रमाणन की स्थिति और नियमों के अनुपालन पर निर्भर करेगा।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *