November 4, 2026

भोपाल: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। फैसले को लेकर अलग-अलग पक्षों के वकीलों, भाजपा नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। भाजपा ने फैसले का सम्मान करते हुए OBC वर्ग के हित में आगे कानूनी कदम उठाने की बात कही है, जबकि कांग्रेस ने सरकार की पैरवी पर सवाल उठाए हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर 2022 तक की गई जॉइनिंग को वैध रखने और इसके बाद की जॉइनिंग की वैधता पर अलग रुख अपनाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, फैसले के सटीक दायरे, प्रभावित भर्तियों और लागू होने वाली शर्तों की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट के लिखित आदेश का विस्तृत अध्ययन जरूरी है।

सामान्य वर्ग के वकील ने फैसले को बताया अहम

सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी करने वाले वकील आदित्य संघी ने हाईकोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, इस निर्णय का अन्य राज्यों में भी कानूनी मामलों के दौरान संदर्भ दिया जा सकता है।

संघी ने कहा कि आरक्षण का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जा सकता और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से इन दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर रही थी।

OBC पक्ष के वकील ने सरकार की पैरवी पर उठाए सवाल

OBC वर्ग की ओर से पक्ष रखने वाले वकील विनायक शाह ने कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट में OBC आरक्षण के पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि OBC पक्ष रखने वाले वकीलों को जानबूझकर अलग किया गया।

शाह ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि विधानसभा से पारित कानून के बावजूद OBC आरक्षण को लेकर प्रतिकूल फैसला आया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर OBC हितों के प्रति उदासीन रहने का आरोप भी लगाया।

भाजपा बोली- फैसले का सम्मान, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

भाजपा प्रवक्ता योगेश गुप्ता ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने के लिए आवश्यक विशेष परिस्थितियों को हाईकोर्ट के सामने पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय आरक्षण के मुद्दे को लेकर राजनीतिक रणनीति अपनाई गई थी।

गुप्ता ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करती है और OBC वर्ग के हितों के प्रति संवेदनशील है। उनके मुताबिक, सरकार फैसले की समीक्षा कर रही है और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि OBC आरक्षण के पक्ष में जरूरी तथ्य शीर्ष अदालत के सामने रखे जाएंगे।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने भी कहा कि पार्टी OBC वर्ग के साथ है। उन्होंने फैसले के पीछे पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में अधूरी जानकारी और कमजोर पैरवी को जिम्मेदार बताया। शर्मा के मुताबिक, सरकार OBC वर्ग के हितों के लिए आगे कदम उठाएगी और फिलहाल मामले की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने OBC आयोग के गठन का भी उल्लेख किया।

कमलनाथ का आरोप- सरकार की कमजोर पैरवी से OBC आरक्षण को नुकसान

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा पर OBC विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में उनकी सरकार ने मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था।

कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की कमजोर पैरवी और अधूरी जानकारी के कारण हाईकोर्ट में OBC आरक्षण के पक्ष को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि भाजपा अदालत में अपने तर्कों से न्यायालय को संतुष्ट नहीं कर पाई।

कमलनाथ ने यह भी कहा कि OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर लड़ाई जारी रखेगी। उनके बयान में भाजपा पर आरक्षण समाप्त कराने की कोशिश करने का आरोप भी शामिल था। ये आरोप कमलनाथ के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

सपाक्स ने भी फैसले पर रखी अपनी राय

सपाक्स के डॉ. केएस तोमर ने कहा कि हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत निर्णय नहीं दे सकता था और उनके अनुसार मौजूदा मामले में ऐसा परिणाम अपेक्षित था। उन्होंने कांग्रेस पर OBC और अन्य वर्गों के बीच राजनीतिक कारणों से टकराव पैदा करने का आरोप लगाया।

तोमर ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक लाभ पहुंचने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा, SC-ST और OBC वर्गों के आरक्षण के अनुपात तथा क्रीमीलेयर से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखी।

उन्होंने कहा कि आरक्षण नीति बनाते समय योग्यता और वंचित वर्गों को मिलने वाले लाभ के बीच संतुलन पर विचार होना चाहिए। ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं; आरक्षण की संवैधानिक वैधता और लागू होने वाली शर्तें संबंधित न्यायिक आदेशों तथा कानून के अनुसार तय होती हैं।

आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। भाजपा नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी की बात कही है, जबकि कांग्रेस ने OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।

फैसले का वास्तविक प्रभाव समझने के लिए हाईकोर्ट के लिखित आदेश में दर्ज निर्देशों, भर्ती की श्रेणियों और जॉइनिंग से संबंधित शर्तों को देखना जरूरी होगा। इससे स्पष्ट होगा कि किन नियुक्तियों पर फैसला लागू होगा और आगे की भर्ती प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा।

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