इंदौर। कांग्रेस को घेरने के लिए बयानबाजी का मंच तैयार था और निशाना भी तय था, लेकिन हमला करते-करते भाजपा के इंदौर शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा खुद इतिहास के एक सवाल में उलझ गए। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मिश्रा ने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का प्रथम प्रधानमंत्री बता दिया।
हालांकि ऐतिहासिक तथ्य यह है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे। ऐसे में कांग्रेस पर हमला करने निकले भाजपा शहर अध्यक्ष का बयान विपक्ष के लिए ही सियासी हथियार बन गया।

कांग्रेस पर हमला, लेकिन खुल गई इतिहास की किताब
सुमित मिश्रा के बयान के सामने आने के बाद कांग्रेस को भाजपा पर पलटवार का मौका मिल गया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जो नेता देश के प्रथम प्रधानमंत्री का नाम सही नहीं बता पा रहे हैं, वे कांग्रेस के इतिहास और राजनीति पर सवाल कैसे उठा सकते हैं।
कांग्रेस के AICC मीडिया कॉर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने भी बयान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के लिए राजनीतिक इतिहास की एकदिवसीय प्रशिक्षण क्लास आयोजित करने की जरूरत है।
यानी भाजपा का हमला कांग्रेस पर था, लेकिन इस बयान के बाद कांग्रेस को पलटवार के लिए अलग से मुद्दा तलाशने की जरूरत नहीं पड़ी।
‘गुरु जैसा चेले’—कैलाश विजयवर्गीय की छाया में सुमित मिश्रा?
सुमित मिश्रा के बयान के बाद इंदौर की राजनीति में एक और चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस इस पूरे मामले को भाजपा की बयानबाजी की शैली से जोड़कर देख रही है।
इंदौर के वरिष्ठ भाजपा नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक और कई बार विवादों में घिरे बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं। हाल के वर्षों में उनके कई बयान राजनीतिक विवाद का कारण बने हैं। जून 2026 में इंदौर के एक कार्यक्रम में उनके कथित ‘काफिर’ वाले बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था।
अब भाजपा के शहर अध्यक्ष का इतिहास से जुड़ा बयान सामने आने के बाद कांग्रेस ने ‘गुरु जैसा चेले’ वाले अंदाज में भाजपा पर निशाना साधने का मौका पकड़ लिया है।
गुरु की पहचान बयान, चेले की एंट्री इतिहास में चूक से?
कैलाश विजयवर्गीय की राजनीति में आक्रामक बयानबाजी उनकी पहचान का हिस्सा रही है। विपक्ष पर तीखे हमले और बेबाक टिप्पणियों के चलते उनके बयान अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं।
अब उसी इंदौर में भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का बयान सामने आया है। कांग्रेस इसे इसी राजनीतिक शैली की अगली कड़ी के तौर पर पेश कर रही है।
हालांकि यह कहना मुश्किल है कि मिश्रा का बयान महज जुबान फिसलने का मामला था या ऐतिहासिक तथ्य को लेकर भ्रम की वजह से ऐसा हुआ। लेकिन इतना जरूर है कि बयान ने भाजपा को असहज स्थिति में डाल दिया है।
कांग्रेस ने पकड़ा मुद्दा, BJP से सफाई की उम्मीद
कांग्रेस अब इस बयान को भाजपा के नेताओं के राजनीतिक और ऐतिहासिक ज्ञान पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। नीलाभ शुक्ला का एकदिवसीय प्रशिक्षण वाला तंज इसी राजनीतिक हमले का हिस्सा माना जा रहा है।
वहीं, भाजपा के सामने अब यह चुनौती है कि वह इस बयान को महज जुबान की फिसलन बताकर आगे बढ़ती है या अपने शहर अध्यक्ष के बयान पर औपचारिक सफाई देती है।
सवाल यही—जुबान की फिसलन या इतिहास की चूक?
राजनीतिक भाषणों में जुबान फिसलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब बात देश के प्रथम प्रधानमंत्री जैसे बुनियादी ऐतिहासिक तथ्य की हो और बयान पार्टी के शहर अध्यक्ष की ओर से आए, तो विपक्ष को मुद्दा मिलना तय है।
फिलहाल सुमित मिश्रा के बयान ने कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का मौका दे दिया है। इंदौर की सियासत में अब ‘गुरु जैसा चेले’ वाली चर्चा भी जोर पकड़ रही है—जहां कांग्रेस का तंज है कि भाजपा नेता विपक्ष को घेरने निकलते हैं, लेकिन कई बार अपने ही बयानों से घिर जाते हैं।