भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयुष्मान भारत योजना के तहत बकाया भुगतान नहीं मिलने से नाराज निजी अस्पताल संचालकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अस्पताल संचालकों ने एम्बुलेंस रैली निकालकर अपनी मांगें उठाईं। विरोध के तहत एम्बुलेंस और अस्पतालों के बाहर ‘आयुष्मान योजना बंद’ के पोस्टर भी लगाए गए हैं।

निजी अस्पताल संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करना अनिश्चितकाल के लिए बंद कर सकते हैं।
भुगतान में देरी, क्लेम रिजेक्शन और NABH की अनिवार्यता पर नाराजगी
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को दिए गए इलाज का भुगतान लंबे समय से लंबित है। उनका आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से कई क्लेम बिना उचित कारण के खारिज किए जा रहे हैं। वहीं, कुछ स्वीकृत क्लेम की राशि में भी भारी कटौती की जा रही है।
अस्पताल संचालकों ने NABH प्रमाणन की अनिवार्यता को लेकर भी असंतोष जताया है। इसके अलावा प्री-ऑथराइजेशन के बाद क्लेम सेटलमेंट की जटिल प्रक्रिया, निर्धारित समयसीमा (TAT), ऑथेंटिकेशन और अन्य तकनीकी समस्याओं को भी अपनी प्रमुख शिकायतों में शामिल किया है।
उनका कहना है कि इन समस्याओं के कारण अस्पतालों के कामकाज और योजना के तहत सेवाएं जारी रखने में कठिनाइयां आ रही हैं।
8 अक्टूबर तक समाधान नहीं तो अनिश्चितकालीन बहिष्कार
अस्पताल संचालकों ने सरकार और प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 8 अक्टूबर तक उनकी समस्याओं का ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू कर देंगे।
इस चेतावनी के साथ अस्पताल संचालकों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर सकते हैं। हालांकि, योजना के बहिष्कार को लेकर आगे की स्थिति सरकार और अस्पताल संचालकों के बीच होने वाली बातचीत तथा समाधान पर निर्भर करेगी।
1,000 एम्बुलेंस के काफिले के साथ दिल्ली जाने की तैयारी
निजी अस्पताल संचालकों ने अपनी मांगें केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए करीब 1,000 एम्बुलेंसों के काफिले के साथ दिल्ली कूच करने की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि वे प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी समस्याएं और मांगें पहुंचाना चाहते हैं।
फिलहाल अस्पताल संचालकों की प्रमुख मांगें बकाया भुगतान जारी करने, क्लेम रिजेक्शन और कटौती से जुड़ी शिकायतों का समाधान करने तथा योजना की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित हैं। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित प्राधिकरण इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।