September 14, 2026

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से चर्चा के दौरान सिंघार ने दावा किया कि कथित तौर पर जहरीली शराब उत्तर प्रदेश से नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के धार जिले से आई थी। उन्होंने इस पूरे मामले में शासन-प्रशासन के बड़े अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग उठाई।

सिंघार के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

‘हिंदू खतरे में है तो RSS और VHP चुप क्यों?’

उमंग सिंघार ने हादसे को लेकर भाजपा और हिंदू संगठनों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुओं की सुरक्षा की बात की जाती है तो सागर में हुई मौतों के बाद RSS और VHP के नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठना चाहिए।

सिंघार ने दावा किया कि सागर में मृतकों में बड़ी संख्या लोधी समाज के लोगों की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मुरैना और अब सागर में लोगों की मौतें हो रही हैं।

उन्होंने प्रह्लाद पटेल और उमा भारती की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इतने बड़े हादसे के बाद हिंदू संगठनों और नेताओं की ओर से पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर आवाज क्यों नहीं उठाई गई।

अधिकारियों की भूमिका पर सिंघार ने उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक स्तर पर कथित साठगांठ का आरोप लगाते हुए कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एसपी अनुराग सुजानिया की पदस्थापना को लेकर दावा किया कि जहां भी उनकी पोस्टिंग होती है, वहां जहरीली शराब की घटनाएं सामने आती हैं।

इसके अलावा सिंघार ने आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना और संजय दुबे की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि डिस्टिलरी में मेथनॉल कैसे पहुंचा और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

ये सभी आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

‘सागर गोल्ड’ और ‘रॉयल’ ब्रांड को लेकर भी सवाल

सिंघार ने दावा किया कि ‘रॉयल’ और ‘सागर गोल्ड’ नाम की शराब के सेवन के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौतें हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव में ‘सागर गोल्ड’ को कुछ ही घंटों में क्लीन चिट दे दी गई।

उन्होंने दावा किया कि पहले इस ब्रांड पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी हुआ और बाद में उसे वापस ले लिया गया। सिंघार ने सरकार से पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

4 लाख के मुआवजे पर सवाल, 25 लाख की मांग

उमंग सिंघार ने सरकार की ओर से घोषित 4 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।

उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थानीय कांग्रेस संगठन ने पहले ही अवैध शराब को लेकर शिकायतें की थीं, लेकिन उन पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।

‘सरकार जनता की जान की कीमत समझे’

सिंघार ने राज्य सरकार पर राजनीतिक मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को धर्म और समुदाय के मुद्दों से आगे बढ़कर अवैध शराब के नेटवर्क, प्रशासनिक जिम्मेदारी और आम लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि, जहरीली शराबकांड को लेकर नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। मामले की जांच के निष्कर्षों के बाद ही शराब के स्रोत, मेथनॉल की मौजूदगी और कथित प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

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