भोपाल। मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भोपाल में संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज कर दी है। जांच अब केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्ना नगर स्थित एक बौद्ध मठ के पते का कथित तौर पर इस्तेमाल कर करीब 40 लोगों के पास भारतीय पासपोर्ट पहुंचने की पड़ताल भी की जा रही है।
इस खुलासे के बाद पासपोर्ट वेरिफिकेशन और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पतों की जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट जांच के दायरे में
STF करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट की जांच कर रही है। इनमें बड़ी संख्या में पासपोर्ट वर्ष 2021 से 2023 के बीच जारी होने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसी अब पासपोर्ट धारकों के वास्तविक पते, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कर रही है। भोपाल के अलावा डबरा, बैतूल और छिंदवाड़ा से भी संदिग्ध दस्तावेज और पासपोर्ट से जुड़े मामले जांच के दायरे में आए हैं।
फर्जी दस्तावेजों से भारतीय नागरिक साबित करने का आरोप
STF की जांच में कथित तौर पर यह आशंका सामने आई है कि गिरोह भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले कुछ लोगों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाता था। इन दस्तावेजों के जरिए उन्हें भारतीय नागरिक के तौर पर पेश किए जाने के बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार करवाने की बात सामने आई है।
इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाए जाने की जांच की जा रही है। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में किस स्तर पर कौन-कौन लोग शामिल हैं और दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए, इसका अंतिम खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
फर्जी पासपोर्ट से विदेश यात्राओं की भी जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए कुछ पासपोर्ट का इस्तेमाल विदेश यात्रा के लिए भी किया गया। इन पासपोर्ट धारकों के थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
STF अब इस नेटवर्क के संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी रिकॉर्ड में पहचान दर्ज कराने और पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
पासपोर्ट वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर उठे सवाल
एक ही पते से बड़ी संख्या में संदिग्ध पासपोर्ट जारी होने की जांच के बाद अब पासपोर्ट आवेदन के दौरान होने वाले पता और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में है।
STF की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क किस स्तर तक फैला था और सरकारी रिकॉर्ड में संदिग्ध प्रविष्टियां किस तरह दर्ज हुईं।