September 21, 2026

इंदौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में ‘सेवा-संकल्प अभियान’ की शुरुआत इंदौर से की गई। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। इसी दौरान ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना के तहत ग्रामीण संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री के अभियान का भी शुभारंभ किया गया। राज्य सरकार का लक्ष्य करीब 50 लाख ग्रामीण संपत्तियों को इस अभियान के तहत पंजीयन सुविधा उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इससे पहले नितिन नबीन और मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में रोड शो में शामिल हुए।

नितिन नबीन ने स्वामित्व योजना को बताया बड़ा कदम

कार्यक्रम में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के अधिकार से जोड़ने का काम शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए संपत्ति पर कानूनी अधिकार का माध्यम है। नबीन के मुताबिक, मध्यप्रदेश में करीब 68 लाख भूखंडों का सर्वे किया गया है और अब पात्र हितग्राहियों को नि:शुल्क रजिस्ट्री के माध्यम से अधिकार देने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अभियान के तहत इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हितग्राहियों को संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी वितरित किए गए।

सेवा-संकल्प अभियान पर नितिन नबीन का बयान

नितिन नबीन ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित सेवा-संकल्प अभियान को लेकर कहा कि इसे सेवा की भावना से जोड़ा गया है। उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए गरीबों, महिलाओं और जरूरतमंदों के लिए किए गए कार्यों को गिनाया।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन और सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए विपक्ष पर भी निशाना साधा। नबीन ने विपक्ष पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश को बांटने का आरोप लगाया। यह उनके कार्यक्रम में दिए गए राजनीतिक वक्तव्य थे।

प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज का किया उल्लेख

बीजेपी अध्यक्ष ने अपने संबोधन में पीएम विश्वकर्मा योजना, स्टार्टअप और मुद्रा योजना समेत केंद्र सरकार की कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं में अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ योजना का भी उल्लेख किया। साथ ही अयोध्या में राम मंदिर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण को भी सरकार की उपलब्धियों के रूप में गिनाया।

विपक्ष सत्ता के लिए बेचैन: नितिन नबीन

नितिन नबीन ने अपने संबोधन में विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष सत्ता में नहीं होने के कारण बेचैन है। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का दावा किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 का लक्ष्य रखा है।

इन बयानों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं।

CM मोहन यादव ने कहा- ग्रामीणों को मिलेगा संपत्ति का अधिकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी को उनकी संपत्ति का औपचारिक अधिकार मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 23 हजार से अधिक गांवों में अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का अभियान चलाया जा रहा है।

सीएम ने कहा कि पैतृक संपत्ति परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होती है और स्वामित्व दस्तावेज मिलने से ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति के संबंध में कानूनी दस्तावेज प्राप्त होंगे।

रिपोर्टों के अनुसार, स्वामित्व योजना के तहत पात्र ग्रामीण संपत्तियों की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

लाड़ली बहना और श्रमिकों के लिए योजनाओं का जिक्र

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की महिला और श्रमिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना के तहत अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।

उन्होंने रोजगार आधारित उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं को वीजीएफ के माध्यम से अतिरिक्त लाभ देने की बात भी कही। साथ ही जानापाव सहित भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की जानकारी दी।

50 लाख ग्रामीण संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का लक्ष्य

इंदौर से शुरू हुए इस अभियान के तहत मध्यप्रदेश में करीब 50 लाख पात्र ग्रामीण संपत्तियों के नि:शुल्क पंजीयन का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े औपचारिक दस्तावेज मिल सकेंगे और संपत्ति संबंधी अधिकार अधिक स्पष्ट होंगे।

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