भोपाल: राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। करीब 66 गांवों के किसान इसके प्रावधानों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। किसान मुगलिया छाप गांव से विरोध रैली निकाल रहे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

किसानों की मुख्य आपत्ति जमीन के लैंड यूज में प्रस्तावित बदलाव को लेकर है। उनका कहना है कि नए मास्टर प्लान में बड़ा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र की जमीन को ‘संरक्षित भूमि’ की श्रेणी में रखा गया है। इससे खेती और जमीन से जुड़ी दूसरी गतिविधियों पर रोक लगने की आशंका है। किसानों का दावा है कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है।
मुगलिया छाप से निकली किसानों की रैली, नीलबड़ चौराहे पर बैरिकेडिंग
प्रस्तावित मास्टर प्लान के विरोध में किसान मुगलिया छाप गांव से रैली निकाल रहे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट है। एहतियात के तौर पर नीलबड़ चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग की गई है, ताकि यातायात और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
किसानों की दो प्रमुख आपत्तियां
किसानों ने प्रस्तावित मास्टर प्लान को लेकर दो मुख्य मांगें रखी हैं। वे भोजताल संरक्षण के नाम पर कृषि भूमि का लैंड यूज बदलने और ग्राम सभाओं की सहमति नहीं लिए जाने का विरोध कर रहे हैं।
1. BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग
किसानों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 1995 के मास्टर प्लान और 2031 के मास्टर प्लान ड्राफ्ट में भी इन जमीनों का लैंड यूज कृषि ही निर्धारित था।
अब प्रस्तावित मास्टर प्लान में तालाब संरक्षण के नाम पर कृषि भूमि को भोजताल संरक्षण क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है। किसानों ने BIZ-1 और BIZ-2 यानी भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन का लैंड यूज कृषि ही रखा जाए, ताकि वे खेती जारी रखकर परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
2. 66 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा कराकर ली जाए सहमति
किसानों की दूसरी आपत्ति ग्राम पंचायतों की सहमति को लेकर है। उनका आरोप है कि 2031 के मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने के दौरान सरकार ने ग्राम पंचायतों से सहमति लेकर नया ड्राफ्ट तैयार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रस्तावित मास्टर प्लान में ऐसा नहीं किया गया।
किसानों का कहना है कि गांवों के विकास से जुड़े फैसलों में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए 66 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित कराकर प्रस्तावित मास्टर प्लान पर सहमति ली जाए।