September 22, 2026

कवर्धा। जिले के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर परिसर में प्रसाद योजना के तहत करीब 146 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन भोरमदेव कॉरिडोर के कार्यों की समीक्षा को लेकर अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और उपमुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक विजय शर्मा समेत संबंधित अधिकारी और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निर्माण की धीमी रफ्तार पर ठेकेदारों को निर्देश

बैठक में भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्य की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान निर्माण की धीमी गति को लेकर ठेकेदारों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में हर हाल में पूरे किए जाएं।

अधिकारियों को निर्माण कार्य की लगातार निगरानी करने और गुणवत्ता के साथ समय पर काम पूरा कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में साफ कहा गया कि निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गुणवत्ता के साथ समय पर काम पूरा करने पर जोर

सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों मंत्रियों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों को काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों से मौके पर नियमित निरीक्षण करने और निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखने को कहा गया।

कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य भोरमदेव मंदिर क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास करना है। ऐसे में परियोजना के काम में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता बनाए रखना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

भोरमदेव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना लक्ष्य: मंत्री अग्रवाल

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव मंदिर ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहर है। उन्होंने कहा कि मंदिर की ऐतिहासिकता और मूल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए ही विकास कार्य किए जाएंगे।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि भोरमदेव को केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। कॉरिडोर परियोजना के जरिए क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विकास और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

अब प्रशासन की निगरानी निर्माण कार्य की रफ्तार और गुणवत्ता, दोनों पर रहेगी। अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना के काम को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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