भोपाल। मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और केंद्र सरकार के कामकाज का जिक्र कर रहे थे, तभी प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक हिस्सा चर्चा में आ गया। ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों को संपत्ति अधिकार से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने वाली योजना की खूबियां बताते हुए विजयवर्गीय कुछ क्षण के लिए योजना का नाम भूल गए। पास बैठे पूर्व विधायक जीतू जी ने उन्हें योजना का नाम याद दिलाया।

दरअसल, विजयवर्गीय जिस योजना का जिक्र कर रहे थे, वह ‘स्वामित्व योजना’ है। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी पहल बताते हुए ग्रामीण परिवारों को संपत्ति का अधिकार देने के उद्देश्य की जानकारी दी।
‘बहुत बड़ी योजना’ बताते हुए नाम बताने में अटके विजयवर्गीय
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार का बड़ा संकल्प रहा है कि गरीब के पास अपना मकान हो। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि गरीबों के लिए चार करोड़ से अधिक मकान बनाए गए हैं।
इसके बाद उन्होंने ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से रह रहे उन परिवारों का जिक्र किया, जिनके पास अपनी आवासीय संपत्ति से संबंधित वैधानिक रिकॉर्ड नहीं था। विजयवर्गीय ने कहा कि ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रधानमंत्री के स्तर से पहल की गई और लोगों को उनकी संपत्ति से जुड़े अधिकार देने की दिशा में योजना लाई गई।
हालांकि, योजना का नाम बताते समय विजयवर्गीय कुछ क्षण के लिए अटक गए। पास बैठे पूर्व विधायक जीतू जी ने ‘स्वामित्व योजना’ कहकर उन्हें नाम याद दिलाया।
योजना का नाम भूलना बना चर्चा का विषय
विजयवर्गीय खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं का उल्लेख करते हुए उनके काम और उपलब्धियों की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान संबंधित योजना का नाम याद न आने का वीडियो अब चर्चा में है।
विपक्षी दलों और राजनीतिक टिप्पणीकारों की ओर से इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, पूरे घटनाक्रम का केंद्र प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योजना का नाम याद न आना ही रहा।
40 साल से रहने वालों को संपत्ति रिकॉर्ड देने की बात
विजयवर्गीय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार दशकों से एक ही स्थान पर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास अपनी संपत्ति का वैधानिक रिकॉर्ड नहीं था। उन्होंने बताया कि स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में पात्र संपत्ति मालिकों को उनके अधिकारों से जुड़े अभिलेख उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
योजना के तहत ड्रोन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्तियों का सर्वे और मैपिंग किए जाने की व्यवस्था है।
17 सितंबर को इंदौर में होगा स्वामित्व योजना का कार्यक्रम
जिस स्वामित्व योजना का नाम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री को याद दिलाना पड़ा, उसी योजना को लेकर 17 सितंबर को इंदौर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
कार्यक्रम में ग्रामीण आबादी क्षेत्र के पात्र हितग्राहियों को मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज सांकेतिक रूप से वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
मध्यप्रदेश सरकार ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और पंजीयन अभियान चलाने की तैयारी की है। सरकार के मुताबिक, अभियान के जरिए 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विजयवर्गीय का दावा- गरीबों के लिए बड़ा कदम
कैलाश विजयवर्गीय ने स्वामित्व योजना को बड़ा कदम बताते हुए दावा किया कि आजादी के बाद गरीबों के लिए किसी सरकार ने इतना बड़ा काम नहीं किया, जितना मौजूदा सरकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि जो लोग वर्षों से किसी जमीन पर रह रहे थे लेकिन उनके पास उस संपत्ति से संबंधित अधिकार का रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें उसी स्थान पर स्वामित्व देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार की ओर से स्वामित्व योजना को ग्रामीण परिवारों की संपत्तियों को औपचारिक रिकॉर्ड से जोड़ने और संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की पहल के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है।