मध्य प्रदेश के गुना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। मेरिट में टॉप करने वाली पात्र महिलाओं के नाम बदलकर अपात्रों को नियुक्ति दिलाने वाले महिला बाल विकास विभाग के बाबू विजय कुमार मेहरा को कलेक्टर किशोर कन्याल ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं।

दरअसल, मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में उस समय सन्नाटा छा गया जब मधुसूदनगढ़ की रानी सेन अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं। रानी का चयन मेरिट के आधार पर सहायिका पद के लिए हुआ था, लेकिन दो महीने से उसे नियुक्ति पत्र नहीं मिल रहा था। दलाल उससे पैसे की मांग कर रहे थे। जब कलेक्टर कन्याल ने फाइल तलब कर जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बाबू विजय कुमार मेहरा ने नस्ती में ‘रानी सेन’ का नाम बदलकर ‘रजनी सेन’ कर दिया था।
अपात्र को नौकरी दिलाकर मोटी रकम
जांच में सामने आया कि यह कोई अकेला मामला नहीं था। राघौगढ़ में भी मेरिट में चयनित पूजा कुशवाह का नाम बदलकर ‘पूनम कुशवाह’ लिखकर अनुमोदन के लिए भेजा गया था। मकसद साफ था- अक्षरों का मामूली हेरफेर कर पात्रों को बाहर कर अपात्रों को नौकरी दिलाना और बदले में दलालों के जरिए मोटी रकम वसूलना। पीड़ित महिलाओं को महीनों तक गुमराह किया जाता रहा।
पहले से नजर में था बाबू
निलंबित बाबू विजय कुमार मेहरा पहले से ही विभाग की नजर में था। अनुकंपा नियुक्ति के तहत उसे तीन साल में सीपीसीटी परीक्षा पास करनी थी, लेकिन 2019 से 2025 तक कई नोटिस के बाद भी उसने लापरवाही बरती। अब भ्रष्टाचार और पदीय कर्तव्यों के उल्लंघन के आरोप में उस पर मप्र सिविल सेवा नियम 1966 के तहत कार्रवाई की गई है।
प्रशासन को दे जानकारी
कलेक्टर किशोर कन्याल ने जनसुनवाई में ही पीड़िता रानी सेन को नियुक्ति पत्र सौंपकर तत्काल न्याय दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज सभी भर्तियां ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया से होती हैं। यदि कोई भी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति नौकरी के नाम पर पैसे मांगे तो सीधे प्रशासन को सूचना दें। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
भर्तियों की फाइलों को दोबारा जांच के आदेश
कार्रवाई के बाद महिला बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर ने जिले की सभी आंगनबाड़ी भर्तियों की फाइलों की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही निर्देश दिए कि नियुक्ति प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रखी जाए। प्रशासन ने अपील की है कि कोई भी अभ्यर्थी दलालों के झांसे में न आए।