मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बंदरों के लगातार हमलों से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। किशनगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम राईपुरा में ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक और प्रशासन की कथित निष्क्रियता के विरोध में अमानगंज-गुलगंज नेशनल हाईवे-43 पर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर ग्रामीणों के बैठ जाने से हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ।

ग्रामीणों की मांग है कि बंदरों को पकड़ने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
बंदरों के हमलों से परेशान ग्रामीण, इलाज की व्यवस्था पर भी सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि राईपुरा गांव में बंदर लगातार लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिससे कई लोग घायल हो चुके हैं। उनका कहना है कि समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने पर एंटी-रेबीज या जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो पाते।
ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बंदरों को पकड़ने और उनके आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए अब तक पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने हाईवे पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।
मौके पर पहुंचे SDOP और वन विभाग के अधिकारी
चक्काजाम की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। एसडीओपी अजय राठौरिया और वन परिक्षेत्र अधिकारी ने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द बंदरों को पकड़वाने और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, ग्रामीण बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग पर अड़े रहे।
साढ़े तीन घंटे बाद खुला चक्काजाम
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक बातचीत और समझाइश का दौर चला। अधिकारियों के आश्वासन के बाद आखिरकार ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया।
प्रदर्शन खत्म होने के बाद हाईवे पर यातायात बहाल हुआ। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि वन विभाग और प्रशासन बंदरों के हमलों को रोकने तथा घायलों के उपचार की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाएंगे।