May 16, 2026

 यहाँ आपके समाचार को सरल, प्रभावशाली और अधिक पेशेवर हिंदी भाषा में पुनर्लेखित किया गया है:


केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न स्वतंत्र संगठनों के संयुक्त आह्वान पर मंगलवार को देशभर में असंगठित श्रमिकों के शोषण और दमन के खिलाफ “राष्ट्रीय मांग दिवस” मनाया गया। इस अवसर पर नोएडा सहित दिल्ली-एनसीआर में गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई की मांग उठाई गई। इसी क्रम में राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक पर संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के नेतृत्व में श्रमिकों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त मंच के संयोजक एवं आल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मराज महापात्र ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक कम मजदूरी, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और बढ़ते ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें श्रमिकों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय दमन, गिरफ्तारियां, धमकियां और ट्रेड यूनियन नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का रास्ता अपना रही हैं।

उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक प्रतिदिन 10 से 13 घंटे तक काम करने को मजबूर हैं, जबकि उन्हें केवल ₹10,000 से ₹12,000 प्रतिमाह वेतन मिलता है। उन्हें नौकरी की सुरक्षा, ओवरटाइम भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, पीएफ, ईएसआई और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।

डॉ. महापात्र ने कहा कि बढ़ती महंगाई और रसोई गैस (एलपीजी) की लगातार बढ़ती कीमतों ने श्रमिक वर्ग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसी कारण देशभर के मजदूर न्यूनतम मजदूरी ₹26,000 प्रतिमाह करने, 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करने, ठेका श्रमिकों को समान वेतन एवं सुविधाएं देने और श्रम विरोधी चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि श्रमिकों की न्यायोचित मांगों को “राष्ट्रविरोधी” बताकर बदनाम करना दुर्भाग्यपूर्ण है। संयुक्त मंच ने मांग की कि गिरफ्तार श्रमिकों और कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए, सभी झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं, दमनात्मक कार्रवाइयों पर रोक लगे तथा ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाए। साथ ही भारतीय श्रम सम्मेलन के आयोजन, अतिरिक्त कार्य के लिए दुगुना ओवरटाइम भुगतान, कार्यस्थल पर सुरक्षा की गारंटी, ठेका प्रथा समाप्त करने और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी उठाई गई।

प्रदर्शन के दौरान एलपीजी गैस को सस्ता करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग भी की गई। इस कार्यक्रम में इंटक, एचएमएस, एटक, सीटू, एक्टू, संयुक्त ट्रेड यूनियन काउंसिल, पोस्टल यूनियन, केंद्रीय कर्मचारी संगठनों सहित कई श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

प्रदर्शन का नेतृत्व इंटक के सचिव इंद्रमणि पटेल, सीटू महासचिव एस.एन. बनर्जी, सुरेंद्र शर्मा, दिनेश पटेल, ज्योति पाटिल, अनुसुइया ठाकुर, धर्मनी सोनवानी, गजेंद्र पटेल, राजेश पराते, नरोत्तम शर्मा, नवीन गुप्ता, आर्थो कुमार, संदीप सोनी, सुभाष साहू और डी.सी. पटेल ने किया।

कार्यक्रम के अंत में एक प्रस्ताव पारित कर एनआईटी परीक्षा निरस्त होने से प्रभावित छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया गया तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की गई।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *