September 14, 2026

नागपंचमी पर उज्जैन में टूटा आस्था का रिकॉर्ड, नागचंद्रेश्वर के दर्शन को उमड़े 12 लाख से ज्यादा श्रद्धालु

उज्जैन। नागपंचमी पर्व और श्रावण माह के तीसरे सोमवार के विशेष संयोग पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान भगवान श्रीनागचंद्रेश्वर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। साल में केवल एक बार 24 घंटे के लिए खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में इस बार 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पिछले वर्ष करीब 8 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

श्री महाकालेश्वर मंदिर के द्वितीय तल पर स्थित भगवान श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के एक साथ पड़ने से इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे।

प्रशासन के अनुमान से कहीं अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर क्षेत्र और आसपास के मार्गों पर भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए।

महाकाल मंदिर में भी लाखों श्रद्धालु पहुंचे

सावन के तीसरे सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में भी 4 लाख 80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। वहीं बाबा महाकाल की सवारी में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और सड़कों के किनारे खड़े होकर भव्य सवारी के दर्शन किए।

सावन में 77 लाख से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन

श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति के अनुसार 30 जुलाई से 17 अगस्त 2026 तक श्रावण मास के दौरान कुल 77 लाख 51 हजार 231 श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।

लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या

महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया के अनुसार मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए मंदिर समिति की ओर से समय-समय पर दर्शन, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।

नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के इस विशेष संयोग ने एक बार फिर उज्जैन को आस्था के बड़े केंद्र के रूप में सामने रखा, जहां लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल और भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचे।

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