रायपुर। छत्तीसगढ़ में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की मौजूदगी में संबंधित नगर निगमों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। योजना के तहत नवंबर 2026 से बिलासपुर और भिलाई में शुरुआती तौर पर 20-20 ई-बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी है।

नागरिकों को मिलेगी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा
नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा स्वच्छ, हरित और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ यातायात, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने और ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
अरुण साव ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दर्शनीय स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना जरूरी है। ई-बस सेवा से लोगों को बेहतर परिवहन विकल्प मिलेंगे और शहरों के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी।
रायपुर में 100 और बिलासपुर-दुर्ग-भिलाई में 50-50 बसें चलाने की योजना
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के पहले चरण में चार शहरी क्षेत्रों के लिए बसों का प्रस्तावित वितरण इस प्रकार है:
- रायपुर: 100 इलेक्ट्रिक बसें
- दुर्ग-भिलाई: 50 इलेक्ट्रिक बसें
- बिलासपुर: 50 इलेक्ट्रिक बसें
- कोरबा: 40 इलेक्ट्रिक बसें
इस तरह कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, नवंबर 2026 से बिलासपुर और भिलाई में शुरुआती तौर पर 20-20 बसें चलाने की तैयारी की जा रही है।
बसों में छह कैमरे, मोबाइल ऐप से मिलेगी रूट की जानकारी
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ई-बस में छह कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। मोबाइल ऐप के माध्यम से बसों के रूट की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में मोबाइल स्कैनर से भुगतान और ऑनलाइन टिकट जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही चार्जिंग स्टेशन, डिपो, रखरखाव केंद्र और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
समय-सीमा में काम पूरा करने पर जोर
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने योजना के उद्देश्यों और संचालन की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और परिवहन की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण जरूरी है।
उन्होंने चार्जिंग व्यवस्था, डिपो, बस-स्टॉप और रखरखाव केंद्र जैसी सुविधाओं का समय पर विकास करने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। योजना के प्रभावी संचालन के लिए सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा में पूरी करना आवश्यक बताया गया।
कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज गांधी भी उपस्थित रहे।
पांच नगरीय निकायों के महापौर और अधिकारी रहे मौजूद
कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में रायपुर की महापौर मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी, कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और बीरगांव के महापौर नंदलाल देवांगन शामिल हुए।
इसके अलावा रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा, बिलासपुर के आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, कोरबा के आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, भिलाई की आयुक्त सुरुचि सिंह, दुर्ग की आयुक्त लीना कोसम, रिसाली की आयुक्त मोनिका वर्मा और भिलाई-चरोदा के आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत भी मौजूद रहे।
ई-बसों के रंग और कट-आउट का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ ही चारों शहरों में प्रस्तावित ई-बसों के रंग और कट-आउट का विमोचन भी किया गया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता सुनील सिंह और सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील अग्रहरि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।