भिलाई। छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन बंद किए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। अनुदानित शिक्षक संघ, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से पेंशन तत्काल बहाल करने की मांग की है।

संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा और सचिव डॉ. अनुराग पांडेय ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या करते हुए सैकड़ों सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को पहले से मिल रही पेंशन से भी वंचित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद के फैसले की गलत व्याख्या का आरोप
संघ का कहना है कि मंत्रिपरिषद की कार्यसूची में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्ताव रखा गया था कि शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को जिस वेतनमान से वे सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी के अनुरूप पेंशन और उपदान दिया जाए।
संघ के मुताबिक, मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को “नियमों में प्रावधान तथा लोकहित में न होने के कारण” अमान्य किया और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों में उचित विधिक पैरवी करने की सलाह दी।
संघ का तर्क है कि इस निर्णय का अर्थ केवल प्रस्तावित नई व्यवस्था को मंजूरी नहीं देना है। मंत्रिपरिषद के निर्णय में पहले से स्वीकृत और वर्षों से मिल रही पेंशन को बंद करने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है।
1 और 11 सितंबर के आदेश पर उठाए सवाल
संघ ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को ऐसे आदेश जारी किए, जिनके बाद सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की मौजूदा पेंशन रोक दी गई।
संघ का यह भी दावा है कि इन आदेशों से कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की भविष्य की पेंशन एवं ग्रेच्युटी की पात्रता पर भी असर पड़ा है। संगठन ने इसे मंत्रिपरिषद के निर्णय की सीमा से बाहर की कार्रवाई बताते हुए आदेशों को वापस लेने की मांग की है।
37 साल से मिल रही है पेंशन
अनुदानित शिक्षक संघ के अनुसार, शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को राज्य शासन की ओर से करीब 37 वर्षों से पेंशन और ग्रेच्युटी दी जा रही है।
संघ ने बताया कि 26 अक्टूबर 2010 के शासनादेश के अनुसार सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन और चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी दी जाती रही है।
संघ का कहना है कि उनकी मांग किसी नई व्यवस्था की नहीं, बल्कि इस बात की है कि जिस वेतनमान में कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी के अनुरूप उनकी पेंशन निर्धारित की जाए।
जुलाई-अगस्त की पेंशन भी लंबित होने का दावा
संघ ने कहा कि पेंशन सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा है। वृद्धावस्था में चिकित्सा, दवाइयों और पारिवारिक जरूरतों के लिए बड़ी संख्या में पेंशनभोगी इसी राशि पर निर्भर हैं।
संघ के अनुसार जुलाई और अगस्त 2026 की पेंशन का भुगतान लंबित है, जबकि सितंबर से पेंशन बंद किए जाने की स्थिति सामने आई है। संगठन ने इसे सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए गंभीर आर्थिक परेशानी बताया है।
संघ ने सरकार के सामने रखीं ये मांगें
अनुदानित शिक्षक एवं कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि—
- 1 सितंबर और 11 सितंबर 2026 के आदेश तत्काल वापस लिए जाएं।
- सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की पूर्ववत पेंशन तत्काल बहाल की जाए।
- जुलाई और अगस्त 2026 समेत सभी लंबित पेंशन का भुगतान किया जाए।
- कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की पात्रता पूर्ववत सुरक्षित रखी जाए।
संघ ने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने कहा कि यदि पेंशन शीघ्र बहाल नहीं की गई तो प्रभावित शिक्षक और कर्मचारी लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ उपलब्ध वैधानिक उपायों का सहारा लेने के लिए बाध्य होंगे।