November 6, 2026

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर की सीवर समस्या दूर करने के लिए शुरू की गई करीब 113 करोड़ रुपये की सीवर परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के लिए शिवपुरी पहुंचे केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परियोजना की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी और इसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने की बात कही।

परियोजना को लेकर पहले से ही तकनीकी और प्रशासनिक सवाल उठते रहे हैं। हाईकोर्ट में चल रहे मामले में भी परियोजना की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

दादा के समय की सीवर लाइन अभी भी चालू

सिंधिया ने शिवपुरी की पुरानी और नई सीवर व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि उनके दादा के समय करीब 15 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई गई थी, जिसमें से लगभग 7 किलोमीटर लाइन आज भी काम कर रही है।

इसके विपरीत आधुनिक तकनीक और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नई सीवर परियोजना शहर को अपेक्षित सुविधा नहीं दे सकी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना पर करीब 113 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी कई हिस्सों में सीवर व्यवस्था पूरी तरह चालू नहीं हो सकी है।

2011 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

शिवपुरी की सीवर परियोजना का काम करीब 14 साल पहले शुरू हुआ था। परियोजना को निर्धारित समय में पूरा किया जाना था, लेकिन लंबे समय बाद भी इसके संचालन और कनेक्टिविटी को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। इससे शहर में सीवर और गंदे पानी की समस्या को लेकर लोगों की परेशानी जारी है।

हाईकोर्ट में हुई कार्यवाही के दौरान राज्य की ओर से बताया गया था कि सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा किया गया, लेकिन घरों को सीवर लाइन से जोड़ने का काम परियोजना में शामिल नहीं था। अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए परियोजना की संरचना और जिम्मेदार अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे।

जांच में अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की होगी पड़ताल

परियोजना को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश पर आठ सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार टीम में वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जानी है।

अदालत की कार्यवाही में यह भी सामने आया कि यदि जांच में काम निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है और अधिकारियों या ठेकेदारों की भूमिका सामने आती है, तो नुकसान की भरपाई की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

अब MPUDC को सौंपने की तैयारी

सीवर परियोजना को आगे पूरा कराने के लिए इसे मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPUDC) को सौंपने की तैयारी की जा रही है। सिंधिया ने कहा कि परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था के तहत काम आगे बढ़ाया जाएगा।

फिलहाल परियोजना की कमियों और कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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