भोपाल। राजधानी भोपाल में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक महिला को वीडियो कॉल किया और उसके बैंक खाते में 7 करोड़ रुपए की टेरर फंडिंग आने का डर दिखाया। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर आरोपियों ने महिला से कथित तौर पर 35 लाख रुपए ठग लिए।

हैरानी की बात यह है कि पीड़ित महिला ने ठगी के कुछ दिन बाद ही साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दर्ज करा दी थी, लेकिन FIR करीब एक साल बाद दर्ज की गई। अब गोविंदपुरा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वीडियो कॉल कर पुलिस अधिकारी बनकर डराया
जानकारी के मुताबिक, जालसाजों ने महिला को वीडियो कॉल किया और खुद को पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताया। आरोपियों ने महिला से कहा कि उसके बैंक खाते में 7 करोड़ रुपए की कथित टेरर फंडिंग पहुंची है और इस मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
आरोपियों ने गिरफ्तारी और बदनामी का डर दिखाकर महिला को मानसिक दबाव में लिया। इसके बाद उसे लगातार ऑनलाइन निगरानी में रखने की बात कहते हुए कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया गया।
5 किस्तों में ट्रांसफर कराए 35 लाख रुपए
आरोपियों ने महिला से मामले को खत्म करने और कथित जांच से बचने के नाम पर पैसों की मांग की। डर के चलते महिला ने आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में 5 अलग-अलग किस्तों में कुल 35 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
बाद में महिला को ठगी का एहसास हुआ और उसने इसकी शिकायत साइबर क्राइम शाखा में की।
2025 में हुई थी ठगी, करीब एक साल बाद FIR
पुलिस के मुताबिक, घटना 23 सितंबर 2025 की है। महिला ने ठगी के कुछ दिन बाद 26 सितंबर 2025 को साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के बाद कथित तौर पर पैसों के लेन-देन और मनी ट्रेल की जांच की गई। हालांकि, FIR दर्ज होने में करीब 12 महीने का समय लग गया। अब गोविंदपुरा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
मनी ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश
पुलिस अब उन बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी जुटा रही है, जिनमें महिला से रकम ट्रांसफर कराई गई थी। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें जालसाज पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को डराते हैं और उसे घर से बाहर न निकलने तथा लगातार ऑनलाइन संपर्क में रहने के लिए मजबूर करते हैं। पुलिस लगातार लोगों को ऐसे कॉल आने पर किसी भी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करने और तत्काल संबंधित एजेंसी या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह देती है।